अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 928, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंवयमु त्वामपूर्व स्थूरं न कच्चिद् भरन्तो ऽ वस्यवः. वाजे चित्रं हवामहे.. (१) हे सदा नवीन रहने वाले इंद्र! तुम पूज्य हो और अपने उपासकों का पोषण करने वाले हो. हम रक्षा की कामना करते हुए तुम्हें बुलाते हैं. तुम हमारे किसी विरोधी के पास मत जाओ. हम तुम्हें उसी प्रकार बुलाते हैं, जैसे किसी अत्यधिक शक्तिशाली राजा को विजय के हेतु बुलाया जाता है. (१) उप त्वा कर्मन्नूतये स नो युवोग्रश्चक्राम यो घृषत्. त्वामिद्धिावितारं ववृमहे सखाय इन्द्र सानसिम्.. (२) हे इंद्र! हम युद्ध प्रारंभ होने पर रक्षा के लिए तुम्हारे समीप जाते हैं. जो इंद्र नित्य युवा और शत्रुओं को पराजित करने वाले तथा अत्यधिक शक्तिशाली हैं, वे हमारी रक्षा के लिए आएं. हे इंद्र! हम तुम्हें अपना सखा मानते हैं, इसलिए हम अपनी रक्षा के हेतु तुम्हारी ही इच्छा करते हैं. (२) यो न इदमिदं पुरा प्र वस्य आनिनाय तमु व स्तुषे. सखाय इन्द्रमूतये.. (३) हे मित्र बने हुए यजमान! मैं तुम्हारी रक्षा के लिए इंद्र की स्तुति करता हूं. जिस इंद्र ने पहले हमें निर्देश कर के गाय आदि धन दिया था, हम उसी इंद्र की स्तुति करते हैं. (३) हर्यश्वं सत्पतिं चर्षणीसहं स हि ष्मा यो अमन्दत. आ तु नः स वयति गव्यमश्व्यं स्तोतृभ्यो मघवा शतम्.. (४) इन मनुष्यों के रक्षक इंद्र के अश्व हरे रंग के हैं. जो इंद्र मनुष्यों पर नियंत्रण रखते हैं तथा स्तुतियां सुन कर प्रसन्न होते हैं, मैं उन्हीं इंद्र की स्तुति करता हूं. वे इंद्र हम स्तोताओं को सौ गाएं तथा सौ घोड़े प्रदान करें. (४) सूक्त—१५ देवता—इंद्र प्र मंहिष्ठाय बृहते बृहद्रये सत्यशुष्माय तवसे मतिं भरे. अपामिव प्रवणे यस्य दुर्धरं राधो विश्वायु शवसे अपावृतम्.. (१) मैं अतिशय महान, गुणों में बढ़े हुए, अत्यधिक धन वाले एवं सच्ची सामर्थ्य वाले इंद्र की स्तुति बल प्राप्त करने के लिए करता हूं. उन इंद्र का धन सभी मनुष्यों का पोषण करने में समर्थ है. जिस प्रकार जल नीचे की ओर जाता है, उसी प्रकार इंद्र का धन बल प्रदान करने के लिए प्रवृत्त होता है. (१) अध ते विश्वमनु हासदिष्टय आपो निम्नेव सवना हविष्मतः. ebook converter DEMO Watermarks*