भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 931, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 931

बृहस्पति देव ने जिस समय बल नामक असुर के हिंसा के साधन आयुध को अग्नि के समान ताप वाले अपने मंत्रों से तोड़ दिया था, उस समय उन्होंने बल असुर के द्वारा छिपाई गई दुधारू गायों को उसी प्रकार प्रकट कर दिया था, जिस प्रकार चबाए हुए अन्न को जीभ भक्षण करती है. जब बृहस्पति देव ने पर्वत की गुफा में छिपी हुई गायों को उन के रंभाने के स्वर से जान लिया, तब पर्वत का भेदन कर के उन्होंने गायों को इस प्रकार बाहर निकाल लिया, जिस प्रकार मोर आदि के अंडे को तोड़ कर उस के भीतर से बच्चा निकाला जाता है. (६) बृहस्पतिरमत हि त्यदासां नाम स्वरीणां सदने गुहा यत्. आण्डेव भित्त्वा शकुनस्य गर्भमुदुस्रियाः पर्वतस्य त्मनाजत्.. (७) बृहस्पति देव ने पर्वत में छिपाई हुई गायों को शिला हटा कर उसी प्रकार देख लिया, जिस प्रकार जल कम हो जाने पर मनुष्य उस में रहने वाली मछलियों को देख लेते हैं. जिस प्रकार वृक्ष से चमस बाहर निकाला जाता है, उसी प्रकार बृहस्पति देव ने गायों को छिपाने वाले बल असुर को मार कर गायों को बाहर निकाला था. (७) अश्रापिनद्धं मधु पर्यपश्यन्मत्स्यं न दीन उदनि क्षियन्तम्. निष्टज्जभार चमसं न वृक्षाद् बृहस्पतिर्विर्वेणा विकृत्य.. (८) बृहस्पति देव ने पर्वत में छिपाई हुए गायों को उसी प्रकार देख लिया, जिस प्रकार जल कम हो जाने पर मनुष्य उस में रहने वाली मछलियों को देख लेते हैं. जिस प्रकार वृक्ष से चमस बाहर निकाला जाता है उसी प्रकार बृहस्पति देव ने गायों को छिपाने वाले असुर को मार कर गायों को बाहर निकाला था. (८) सोषामविन्दत् स स्व १: सो अग्निं सो अर्केण वि बबाधे तमांसि. बृहस्पतिर्गोवपुषो वलस्य निर्मज्जानं न पर्वणो जभार.. (९) बृहस्पति देव ने पर्वत की गुफा में अंधकार से छिपी हुई गायों को देखने के लिए उषा देवी को प्राप्त किया. बृहस्पति देव ने प्रकाश करने के लिए सूर्य एवं अग्नि को प्राप्त किया. इन्हें प्राप्त कर के बृहस्पति देव ने प्रकाश से अंधकार को नष्ट कर दिया. बृहस्पति देव ने गौ रूपधारी असुर का हनन कर के गायों को इस प्रकार बाहर निकाला, जिस प्रकार हड्डियों से मज्जा अर्थात् चरबी बाहर निकाली जाती है. (९) हिमेव पर्णा मुषिता वनानि बृहस्पतिनाकृपयद् वलो गाः. अनानुकृत्यमपुनश्चकार यात् सूर्यामासा मिथ उच्चरातः.. (१०) जिस प्रकार हिमपात सारहीन पत्तों को ग्रहण करता है, उसी प्रकार बृहस्पति देव ने बल असुर के द्वारा चुराई गई गायों को प्राप्त किया. बल असुर ने भी गाएं बृहस्पति देव को प्रदान कीं. बृहस्पति द्वारा ही सूर्य दिन को और चंद्रमा रात्रि को प्रकट करता हुआ घूमता है. ebook converter DEMO Watermarks*