अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 948, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअरं कामाय हरयो दधन्विरे स्थिराय हिन्वन् हरयो हरी तुरा. अर्वद्भिर्यो हरिभिर्जोषमीयते सो अस्य कामं हरिवन्त्मानशे.. (२) हरे रंग वाले सोम युद्धों में अटल रहने वाले इंद्र को धारण करते हैं. सोम ही इंद्र के घोड़ों को यज्ञ की ओर जाने के लिए प्रेरित करते हैं. जो इंद्र अपने अश्वों द्वारा वेग से यज्ञ में आते हैं, वे सोमरस वाले यजमान के पास पहुंच जाते हैं. (२) हरिश्च्मशारुर्हरिकेश आयसस्तुरस्पेये यो हरिपा अवर्धत. अर्वद्भिर्यो हरिभिर्वाजिनीवस्रुरति विश्वा दुरिता पारिषद्वरी.. (३) इंद्र के केश, दाढ़ी और मूंछें सभी हरे रंग के हैं. इंद्र संस्कारित होने पर सोमरस को पीते हुए वृद्धि प्राप्त करते हैं. इंद्र सोमरस को पीने के लिए अपने तेज चलने वाले घोड़ों से सोमपान करने आते हैं. हवि उन का धन है. इंद्र अपने रथ में घोड़ों को जोड़ कर हमारे सभी पाप नष्ट करें. (३) सुवेव यस्य हरिणी विपेततुः शिप्रे वाजाय हरिणी दविध्वतः. प्र यत् कृते चमसे मर्मृजद्धरी पीत्वा मदस्य हर्यतस्यान्धसः.. (४) यज्ञ में जिस प्रकार वे चलते हैं, उसी प्रकार सोमरस का पान करने के लिए इंद्र की हरे रंग की चिबुक अर्थात् ठुड्डी चलती है. जब चमस सोमरस से भर जाता है, तब उसे पीने के लिए इंद्र की ठुड्डी फड़कने लगती है. उस समय इंद्र अपने घोड़ों का परिमार्जन अर्थात् सफाई करते हैं. (४) उत स्म सद्म हर्यतस्य पस्त्यो ३ रत्यो न वाजं हरिवाँ अचिक्रदत्. मही चिद्धि धिषणाहर्यदोजसा बृहद् वयो दधिषे हर्यतश्चिदा.. (५) इंद्र का निवास द्यावा पृथ्वी में है. जिस प्रकार घोड़ा युद्ध क्षेत्र में अग्रसर होता है, उसी प्रकार इंद्र अपने घोड़ों पर चढ़ कर यज्ञशाला की ओर बढ़ते हैं. हे इंद्र! हमारा स्तोत्र तुम्हारी कामना करता है. तुम भी यजमान की कामना करते हुए उसे असीमित धन देते हो. (५) सूक्त—३२ देवता—इंद्र आ रोदसी हर्यमाणो महित्वा नव्यंनव्यं हर्यसि मन्म नु प्रियम्. प्र पस्त्यमसुर हर्यतं गोराविष्कृधि हरये सूर्याय.. (१) हे इंद्र! तुम अपनी महिमा से आकाश और धरती को व्याप्त करते हो. तुम सदा नवीन रहते हो. तुम हमारे प्रिय स्तोत्र की इच्छा करते हो. तुम पणियों द्वारा चुराई गई गायों को रखने का स्थान सूर्य को बता देते हो. ऐसी कृपा करो कि सूर्य स्तुति करने वालों को वह गोष्ठ अर्थात् गायों को रखने का स्थान दे दें. (१) ebook converter DEMO Watermarks*