अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 949, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ त्वा हर्यन्तं प्रयुजो जनानां रथे वहन्तु हरिशिप्रमिन्द्र. पिबा यथा प्रतिभृतस्य मध्वो हर्यन् यज्ञं सधमादे दशोणिम्.. (२) हे इंद्र! तुम सोमरस पीने के इच्छुक हो. सोमरस पीने से तुम्हारी ठुड्डी हरे रंग की हो गई है. तुम्हारे रथ में जुड़े हुए घोड़े तुम को यहां लाएं. चमस आदि पात्रों में रखे हुए सोम वाले घर में आ कर तुम सोम को पी सको, इसलिए तुम्हारे अश्व तुम्हें यहां ले आएं. (२) अपा: पूर्वेषां हरिव: सुतानामथो इदं सवनं केवलं ते. ममद्धि सोमं मधुमन्तमिन्द्र सत्रा वृषञ्जठर आ वृषस्व.. (३) हे इंद्र! तुम प्रातः सवन में सोम को पी चुके हो. यह माध्यंदिन सवन भी तुम्हारा ही है. इस सवन में तुम सोम का पान करते हुए प्रसन्न बनो. तुम इस पूरे सोमरस को एक साथ ही अपने पेट में भर लो. (३) सूक्त-३३ देवता—इंद्र अप्सु धूतस्य हरिव: पिबेह नृभि: सुतस्य जठरं पृणस्व. मिमिक्षुर्यमद्रय इन्द्र तुभ्यं तेभिर्वर्धस्व मदमुक्थवाह:.. (१) हे इंद्र! अध्वर्यु जनों ने इस सोम का संस्कार किया है. तुम इसे पी कर अपना पेट भर लो. जिस सोम को पत्थर कूट चुके हैं, उसे पीते हुए तुम हर्ष युक्त बनो. (१) प्रोग्रां पीतिं वृष्ण इयर्मि सत्यां प्रयै सुतस्य हर्यश्व तुभ्यम्. इन्द्र धेनाभिरिह मादयस्व धीभिर्विश्वाभि: शच्या गृणान:.. (२) हे इंद्र! तुम इच्छित फल की वर्षा करते हो. मैं तुम्हें सोम की प्रचंड शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता हूं. तुम यज्ञ कार्य में आ कर स्तुतियों से प्रशंसित और हवि से तृप्त बनो. (२) ऊती शचीवस्तव वीर्येण वयो दधाना उशिज ऋतज्ञा:. प्रजावदिन्द्र मनुषो दुरोणे तस्थुर्गृणन्तः सधमाद्यास:.. (३) हे इंद्र! तुम्हारे द्वारा पुत्र आदि रूप संतान तथा अन्न से युक्त सत्य के ज्ञाता तथा तुम्हें चाहने वाले ऋत्विज् यजमान के घर में तुम्हारी स्तुति करते हुए बैठें. (३) सूक्त-३४ देवता—इंद्र यो जात एव प्रथमो मनस्वान् देवो देवान् क्रतुना पर्यभूषत्. यस्य शुष्माद् रोदसी अभ्यसेतां नृम्णस्य मह्ना स जनास इन्द्र:.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*