अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 950, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइंद्र के बल से आकाश और पृथ्वी भयभीत रहते हैं. इंद्र ने प्रकट होते ही अन्य देवताओं को अपनी रक्षा में ले लिया. (१) यः पृथिवीं व्यथमानामदृंहद् यः पर्वतान् प्रकुपिताँ अरम्णात्. यो अन्तरिक्षं विममे वरीयो यो द्यामस्तभ्नात् स जनास इन्द्रः.. (२) हे असुर! इंद्र वे हैं, जिन्होंने हिलती हुई भूमि को स्थिर किया, पंखों वाले पर्वतों के पंख काट कर उन्हें अचल बना दिया तथा अंतरिक्ष और आकाश को स्थिर किया. (२) यो हत्वाहिमरिणात् सप्त सिन्धून् यो गा उदाजदपधा वलस्य. यो अश्मनोरन्तरग्निं जजान संवृक् समत्सु स जनास इन्द्रः.. (३) जिन्होंने आकाश में विचरण करने वाले मेघ का भेदन कर के नदियों को प्रवाहित किया तथा बल असुर द्वारा चुराई गई गायों को प्रकट किया, जिन्होंने मेघों में भरे हुए पाषाणों से विद्युत को उत्पन्न किया तथा जो युद्धों में शत्रुओं का विनाश करते हैं, वे ही इंद्र हैं. (३) येनेमा विश्वा च्यवना कृतानि यो दासं वर्णमधरं गुहाकः. श्वघ्नीव यो जिगीवांलक्षमाददर्यः पुष्टानि स जनास इन्द्रः.. (४) हे असुरो! जिन्होंने दिखाई देते हुए लोकों को स्थिर किया, असुरों को गुफाओं में डाल दिया, प्रत्यक्ष शत्रुओं पर विजय प्राप्त की तथा जो शत्रु के धनों को छीन लेते हैं, वे ही इंद्र हैं. (४) यं स्मा पृच्छन्ति कुह सेति घोरमुतेमाहुर्नैषो अस्तीत्येनम्. सो अर्यः पुष्टीर्विज इवा मिनाति श्रदस्मै धत्त स जनास इन्द्रः.. (५) शत्रुओं का विनाश करने वाले इंद्र के संबंध में लोग अनेक शंकाएं करते हैं. इंद्र शत्रुओं की रक्षा करने वाली सेनाओं का पूर्ण नाश कर देते हैं. हे मनुष्यो! उन इंद्र पर विश्वास करो तथा उन के प्रति श्रद्धावान बनो. इंद्र के अतिरिक्त वृत्रासुर आदि शत्रुओं को कौन जीत सकता था. वे इंद्र शत्रु विजेता हैं. (५) यो रध्रस्य चोदिता यः कृशस्य यो ब्रह्मणो नाधमानस्य कीरेः. युक्तग्राव्णो यो ऽविता सुशिप्रः सुतसोमस्य स जनास इन्द्रः.. (६) जो इंद्र निर्धनों को धन देते हैं और असहायों की सहायता करते हैं, जो स्तुति करने वाले ब्राह्मणों को मनचाहा फल प्रदान करते हैं, जिन की चिबुक अर्थात् ठुड्डी सुंदर है तथा जो सोम का संस्कार करने वाले यजमानों के रक्षक हैं, हे मनुष्यो! वे ही इंद्र हैं. (६) यस्याश्वासः प्रदिशि यस्य गावो यस्य ग्रामा यस्य विश्वे रथासः. यः सूर्य य उषसं जजान यो अपां नेता स जनास इन्द्रः.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*