भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 959, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 959

हे इंद्र! यजमान राजा सुदास ने तुम्हें हवि दान किया था. वे धन सुदास के पास सदा रहे थे. हे इंद्र! तुम बहुत से कर्म करने वाले तथा कामनाओं की वर्षा करने वाले हो. हे इंद्र! तुम्हें यज्ञ में लाने के लिए मैं हरि नाम वाले अथवा हरे रंग के घोड़ों को तुम्हारे रथ में जोड़ता हूं. हे बलशाली इंद्र! हमारे स्तोत्र तुम्हें प्राप्त हों. (६) मा ते अस्यां सहसावन् परिष्टावघाय भूम हरिवः परादै. त्रायस्व नो ऽ वृकेभिर्वरूथैस्तव प्रियासः सूरिषु स्याम.. (७) हे शक्तिशाली एवं हरे रंग के अथवा हरि नाम के घोड़ों के स्वामी इंद्र! हम तुम्हारी सेवा का त्याग करने वाले न हों अर्थात् सदा तुम्हारी सेवा करते रहें. हे इंद्र! अपनी सेनाओं के द्वारा हमारी रक्षा करो, जिन्हें कोई रोक नहीं सकता. हे इंद्र! हम स्तोत्रों का उच्चारण करने वालों में तुम्हारे प्रिय बनें. (७) प्रियास इत् ते मघवन्नभिष्टौ नरो मदेम शरणे सखायः. नि तुर्वशं नि याद्वं शिशीह्यतिथिग्वाय शंस्यं करिष्यन्.. (८) हे इंद्र! हम यजमान तुम्हारे मित्र हैं. हम अपने घरों में प्रसन्न रहें. तुम अतिथिग्व नाम के राजा को सुख प्रदान करते हुए तुर्वश और यदु नाम के राजाओं की रक्षा करो. (८) सद्यश्चिन्नु ते मघवन्नभिष्टौ नरः शंसन्त्युक्थशास उक्था. ये ते हवेभिर्वि पर्णीरदाशन्नस्मान् वृणीष्व युज्याय तस्मै.. (९) हे धन के स्वामी इंद्र! तुम्हारे आने के समय ऋत्विज् उक्थ नाम के मंत्रों का उच्चारण करते हैं. जो ऋत्विज् तुम्हारा आह्वान कर के यज्ञ न करने वालों को नष्ट करते हैं, वे भी उक्थ नाम के मंत्रों को बोलते हैं. उक्थों का उच्चारण करने वाले हम को तुम फल प्रदान करने के हेतु वरण करो. (९) एते स्तोमा नरां नृतम तुभ्यमस्मद्रयञ्चो ददतो मघानि. तेषामिन्द्र वृत्रहत्ये शिवो भूः सखा च शूरो ऽ विता च नृणाम्.. (१०) हे नेताओं के मध्य श्रेष्ठ इंद्र! हमारे सामने आकर धन प्रदान करने वाले तुम्हारे लिए ये स्तोत्र किए जा रहे हैं. हम स्तोत्राओं के पाप नष्ट कर के हमें सुखी बनाओ तथा हमें घर प्रदान करो. हम तुम्हें हवि देते हैं. तुम मित्र के समान हमारी रक्षा करो. (१०) नू इन्द्र शूर स्तवमान ऊती ब्रह्मजूतस्तन्वा वावृधस्य. उप नो वाजान् मिमीह्युप स्तीन् यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (११) हे इंद्र! तुम हम से स्तुति और हवि प्राप्त करते हुए अधिक उन्नति करो तथा हमें धन और पुत्र प्रदान करो. हे अग्नि आदि देवताओ! तुम भी हमारा कल्याण करते हुए हमारे रक्षक बनो. (११) ebook converter DEMO Watermarks*