अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 958, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त-३७ देवता—इंद्र यस्तिग्मशृङ्गो वृषभो न भीम एकः कृष्टीश्चयावयति प्र विश्वाः. यः शश्वतो अदाशुषो गयस्य प्रयन्ता ऽ सि सुष्वितराय वेदः.. (१) हे इंद्र! टेढ़े सींगों वाला बैल जिस प्रकार भयभीत करता है, तुम भी उसी प्रकार सब को भयभीत करते हो. तुम हमारे शत्रुओं को दूर भगा सकते हो. जो मनुष्य तुम्हें हवि नहीं देता, उस के धन को तुम उसे प्रदान करो जो तुम्हें हवि देता है. (१) त्वं ह त्यदिन्द्र कुत्समावः शुश्रूषमाणस्तन्वा समर्यॆ. दासं यच्छुष्णं कुयवं न्य स्मा अरन्धय आर्जुनेयाय शिक्षन्.. (२) हे इंद्र! तुम ने संग्राम में कुत्स की रक्षा की. उस समय तुम ने अर्जुनी के पुत्र की रक्षा के निमित्त दास, शुष्ण और कुयव नाम के असुरों को पूरी तरह वश में किया तथा उन का धन कुत्स को दिया. (२) त्वं धृष्णो धृषता वीतहव्यं प्रावो विश्वाभिरूतिभिः सुदासम्. प्र पौरुकुत्सिं त्रसदस्युमावः क्षेत्रसाता वृत्रहत्येषु पूरुम्.. (३) हे इंद्र! तुम्हारा वज्र शत्रुओं को वश में करने वाला है. तुम ने अपने इस वज्र से वीतहव्य और सुदास नाम के राजाओं की रक्षा की. तुम ने इसी वज्र से संग्राम में पुरुकुत्स के पुत्र त्रसदस्यु और पुरु की रक्षा की. (३) त्वं नृभिर्नृमणे देववीतौ भूरीणि वृत्रा हर्यश्व हंसि. त्वं नि दस्युं चुमुरिं धुनिं चास्वापयो दभीतये सुहन्तु.. (४) हे इंद्र! जब युद्ध का अवसर आता है, तब तुम मरुद्गण का सहयोग ले कर बहुत से दस्यु जनों का वध कर देते हो. तुम ने राजर्षि दभीति की रक्षा के लिए वज्र हाथ में ले कर चुमुरि और धुनि नाम के दस्युओं का नाश किया था. (४) तव च्यौत्नानि वज्रहस्त तानि नव यत् पुरो नवतिं च सद्यः. निवेशने शततमाविवेषीरहं च वृत्रं नमुचिमुताहन्.. (५) हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारा वज्र बहुत प्रसिद्ध है. तुम ने अपने इसी वज्र से राक्षसों के निन्यानवे नगरों का विनाश किया था तथा उन के सौवें नगर पर अधिकार कर लिया था, तुम ने अपने वज्र से वृत्र और नमुचि नाम के असुरों का भी वध किया था. (५) सना ता त इन्द्र भोजनानि रातहव्याय दाशुषे सुदासे. वृष्णे ते हरी वृषणा युनज्मि व्यन्तु ब्रह्माणि पुरुशाक वाजम्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*