अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 962, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइंद्र कभी भी युद्ध से पीछे नहीं हटते हैं। उन्होंने ही वृत्र असुर के निन्यानवे वृत्रों (राक्षसों) का विनाश किया था। (१) इच्छन्नश्वस्य यच्छिरः पर्वतेष्वपश्रितम्, तद् विदच्छर्यणावति.. (२) पर्वतों में छिपे हुए अपने घोड़े का सिर प्राप्त करने के इच्छुक इंद्र ने शर्यणावत में प्राप्त किया था, तब उस का वज्र बना कर उन्होंने असुरों का वध किया था। (२) अत्राह गोरमन्वत नाम त्वष्टुरपीच्यम्, इत्था चन्द्रमसो गृहे.. (३) चंद्र मंडल एक ग्रह है. उस में सूर्य रूपी इंद्र ही अपनी एक किरण में विराजते हैं. (३) सूक्त-४२ देवता—इंद्र वाचमष्टापदीमहं नवसक्तिमृतस्पृशम्, इन्द्रात् परि तन्वं ममे.. (१) मैं ने इस वाणी को इंद्र से अपने शरीर में धारण किया है जो सत्य का स्पर्श करने वाली है. उस वाणी के आठ चरण और नौ शीर्ष हैं. (१) अनु त्वा रोदसी उभे ऋक्षमाणमकृपेताम्, इन्द्र यद् दस्युहा ऽ भवः.. (२) हे इंद्र! जब तुम ने असुरों का विनाश किया था, तब तुम्हारी शक्ति को देख कर द्यावा अर्थात् स्वर्ग और पृथ्वी ने तुम पर कृपा की थी. (२) उत्तिष्ठन्नोजसा सह पीत्वी शिप्रे अवेपयः. सोममिन्द्र चमू सुतम्.. (३) हे इंद्र! भलीभांति तैयार किए गए सोमरस को पी कर तुम अपनी ठोड़ी चलाते हुए उठो. (३) सूक्त-४३ देवता—इंद्र भिन्धि विश्वा अप द्विषः परि बाधो जही मृधः. वसु स्पार्हं तदा भर.. (१) हे इंद्र! तुम हमारे शत्रुओं को काट कर हमारी युद्ध संबंधी बाधा दूर करो. तुम हमें वह धन प्रदान करो, जिसे सभी पाना चाहते हैं. (१) यद् वीलाविन्द्र यत् स्थिरे यत् पर्शने पराभृतम्. वसु स्पार्हं तदा भर.. (२) हे इंद्र! तुम हमें वह धन प्रदान करो जो स्थिर व्यक्ति के पास रहता है और जिसे बसनी अर्थात् कमर में बांधी जाने वाली कपड़े की बनी लंबी थैली में भरा जाता है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*