भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 973

हे वीर इंद्र! हमारे यज्ञ में सोमरस तैयार हो जाने पर तुम प्रसन्न बनो तथा बल धारण करो. हम तुम्हें असीमित शक्ति वाला जानते हैं और तुम्हारी कामना करते हैं. तुम हमारी रक्षा करो. (५) एते त इन्द्र जन्तवो विश्वं पुष्यन्ति वार्यम्. अन्तर्हि ख्यो जनानामर्यो वेदो अदाशुषां तेषां नो वेद आ भर.. (६) हे इंद्र! हम तुम्हारी शक्ति बढ़ाते हैं. जो लोग तुम्हें हवि नहीं देते और तुम्हारी निंदा करते हैं, उन का धन छीन कर तुम हमें दो. (६) सूक्त-५७ देवता—इंद्र सुरूपकृत्नुमूतये सुदुघामिव गोदुहे. जुहूमसि द्यविद्यवि.. (१) जिस प्रकार गाय को दुहने के लिए गोदोहक को बुलाया जाता है, उसी प्रकार प्रत्येक अवसर पर अपनी रक्षा के लिए हम इंद्र का आह्वान करते हैं. (१) उप नः सवना गहि सोमस्य सोमपाः पिब. गोदा इद् रेवतो मदः.. (२) सदा हर्षित रहने वाले एवं धनवान इंद्र गाएं प्रदान करने वाले हैं. हे इंद्र हमारे सोमयाग में आ कर तुम सोमरस का पान करो. (२) अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम्. मा नो अति ख्य आ गहि.. (३) हे इंद्र! हम तुम्हारी उत्तम बुद्धि को जानते हैं. तुम दूसरों के द्वारा हमारी निंदा मत कराओ तथा हमारे यज्ञ में पधारो. (३) शुष्मिन्तमं न ऊतये द्युम्निनं पाहि जागृविम्. इन्द्र सोमं शतक्रतो.. (४) हे सैकड़ों कर्मों वाले इंद्र! तुम हमारी रक्षा के लिए शक्ति बढ़ाने वाले इस सोमरस का पान करो. (४) इन्द्रियाणि शतक्रतो या ते जनेषु पञ्चसु. इन्द्र तानि त आ वृणे.. (५) हे बहुत से कर्मों वाले इंद्र! मैं उन शक्तियों का वरण करता हूं जो देवता, पितर आदि में हैं. (५) अगन्निन्द्र श्रवो बृहद् द्युम्नं दधिष्व दुष्टरम्. उत् ते शुष्मं तिरामसि.. (६) हे इंद्र! तुम्हारा असीमित बल हमें प्राप्त हो. तुम हमें वह दमकता हुआ धन प्रदान करो जो शत्रुओं से संघर्ष होने पर हमें विजय दिला सके. हम अपने इस स्तोत्र के द्वारा सोमरस की ebook converter DEMO Watermarks*