अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 974, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंवृद्धि करते हुए तुम्हें शक्तिशाली बनाते हैं. (६) अ॒र्वाव॑तो न॒ आ ग॑ह्यथो॑ शक्र परा॒वत॑:. उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि.. (७) हे इंद्र! तुम दूर या पास जहां कहीं हो, वहीं से हमारे समीप आओ. हे वज्रधारी इंद्र! तुम अपने उत्कृष्ट स्वर्गलोक से भी सोमरस पीने के लिए हमारे यज्ञ में आओ. (७) इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग म॒हद् भ॒यम॒भी ष॑दप चुच्यवत्. स हि स्थि॒रो विच॑र्षणि:.. (८) हे ऋत्विज्! इंद्र बड़े से बड़े भय को भी दूर कर देते हैं. उन सूर्य द्रष्टा अर्थात् सब को देखने वाले इंद्र को कोई पराजित नहीं कर सकता. (८) इन्द्र॑श्च मृळया॑ति नो॒ न न॑: प॒श्चाद॒घं न॑शत्. भ॒द्रं भ॑वाति न: पु॒र:.. (९) यदि इंद्र हमारी रक्षा करेंगे तो हमारे दुःख समाप्त हो जाएंगे और सुख हमारे सामने आएंगे. इंद्र सदा मंगल कर्ता हैं. (९) इन्द्र॒ आशा॑भ्य॒स्परि॒ सर्वा॑भ्यो॒ अभ॑यं करत्. जेता॒ शत्रून् विच॑र्षणि:.. (१०) हमारे जो शत्रु सभी दिशाओं में फैले हुए हैं, इंद्र उन सभी को देखते हैं. इंद्र उन भयों को हम से अलग करें, जो सभी दिशाओं और उपदिशाओं से प्राप्त होने वाले हैं. (१०) क ईं॑ वेद सु॒ते सचा॒ पिब॑न्तं॒ कद् वयो॒ दधे॑. अ॒यं य: पु॒रो वि॒भिनत्त्योज॑सा मन्दान: शिप्र्यन्ध॑स:.. (११) इसे कौन जानता है कि सोमरस निचोड़े जाने पर इंद्र कौन से अन्न को धारण करते हैं? हवि रूप अन्न से प्रसन्न हुए इंद्र अपनी शक्ति से शत्रुओं के नगरों का विनाश करते हैं. (११) दा॒ना मृ॒गो न वा॑र॒ण: पु॑रु॒त्रा च॑रथं दधे. नकि॑ष्ट्वा नि य॑मदा सु॒ते गमो॑ म॒हांश्च॒रस्योज॑सा.. (१२) हे इंद्र! तुम अपने रथ पर सवार हो कर हर्षित बने हुए हिरन के समान अनेक स्थानों पर जाते हो. जब सोमरस निचोड़ा जाता है, उस समय यज्ञ में आने से तुम्हें कोई रोक नहीं सकता. तुम अपने ही बल से महान बन कर घूमते हो. हमारा सोमरस तैयार हो जाने पर तुम हमारे यज्ञ में पधारो. (१२) य उ॒ग्र: सन्ननि॑ष्टृत॒ स्थि॒रो रणा॑य॒ संस्कृ॑त:. यदि॑ स्तो॒तुर्म॑घवा शृ॒णव॒द्वच॒ नेन्द्रो॑ योषत्या गम॑त्.. (१३) इंद्र शक्तिशाली हैं, इसलिए शत्रुओं के युद्ध करने के लिए उद्यत होने पर वे कभी ebook converter DEMO Watermarks*