भारतकोश
आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished51 पृष्ठ

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६ प्राणमयकोश कहा गया है ॥२१॥ मनोमयः कः? मनश्च ज्ञानेन्द्रियपञ्चकं च मिलित्वा मनोमयः कोशः।।२२।। मनोमय कोश क्या है? पञ्चज्ञानेन्द्रियों के सहित संकल्प-विकल्पात्मक मन, मनोमय कोश है ।।२२।। विज्ञानमयः कः? बुद्धिर्ज्ञानेन्द्रियपञ्चकं च मिलित्वा विज्ञानमयः कोशः।।२३।। विज्ञानमय कोश क्या है? अन्तःकरण की निश्चयात्मिका वृत्तिरूप बुद्धि और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ, दोनों मिलकर विज्ञानमय कोश है ।।२३।। आनन्दमयः कोशः कः? प्रियमोदादिवृत्तिमत् स्वस्वरूपाज्ञानं यदस्ति, तदानन्दमयः कोशः। एतत्कोशपञ्चकं च मदीयं शरीरं, मदीयाः प्राणाः, मदीयं मनो मदीया बुद्धिर्मदीयमज्ञानमिति मदीयत्वेनैव ज्ञायते। तद्यथा मदीयत्वेन ज्ञातं कुण्डल कटकगृ- हादिकं स्वस्माद्भिन्नं, तथा मदोयत्वेन ज्ञातमात्मा न भवति ।।२४।। आनन्दमय कोश क्या है? कारणशरीर भूत अविद्या में स्थित प्रिय, मोद तथा प्रमोद वृत्ति सहित मलिन सत्त्व को आनन्दमय कोश कहते हैं। ये पाँचों कोश-अन्नमय कोश स्थूल शरीर मेरा है, प्राण मेरे हैं, मन मेरा है, बुद्धि मेरी है और अज्ञान मेरा है, इस प्रकार आत्मीय रूप से जाने जाते हैं। जैसे कटककुण्डल आदि मेरे हैं, इस प्रकार मुझसे भिन्न हैं। वैसे ही पञ्चकोश मेरे हैं, इस रूप में जाना जाता है। इसलिए पञ्चकोश भिन्न है और