आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें८ स्वप्न अवस्था क्या है ? जाग्रत् अवस्था में जो देखे गये और सुने गये, तज्जनित वासना से निन्द्रा के समय जो प्रपञ्च की प्रतीति होती है, वही स्वप्नावस्था है। सूक्ष्म शरीर और स्वप्नावस्था का अभिमानी आत्मा 'तैजस' कहा जाता है ।।१७।। सुषुप्त्यवस्था का ? अहं किमपि न जानामि सुखेन मया निद्रानुभूयते इति यत्, तत् सुषुप्त्यवस्था । एतदवस्थाकारण- शरीराभिमान्यात्मा प्राज्ञ इत्युच्यते ।।१८।। सुषुप्ति अवस्था क्या है ? 'मैं कुछ नहीं जानता हूँ' 'सुखपूर्वक निद्रा का अनुभव मुझे होता है' ऐसा जिसका परामर्श होता है, वही 'सुषुप्ति अवस्था' है। इस सुषुप्ति अवस्था और कारण शरीर के अभिमानी आत्मा को 'प्राज्ञ' कहा जाता है ।।१८।। पञ्चकोशाः के ? अन्नमयः प्राणमयो मनोमयो विज्ञानमय आनन्दमयश्चेति ।। १६ ।। पञ्च कोश क्या है ? अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय तथा आनन्दमय, ये पञ्च कोश हैं ।। १६ ।। अन्नमयः कः ? अन्नरसेनेव भूत्वाऽन्नरसेनैवाभिवृद्धिं सम्प्राप्यान्नरूपपृथिव्यां यद्विलीयते, सोऽन्नमयः कोशः ।।२०।। अन्नमय कोश क्या है ? अन्न के रस से ही उत्पन्न होकर अन्नरस से ही वृद्धि को प्राप्त होकर जो अन्नरूप पृथ्वी में विलीन होता है, वह स्थूलशरीर अन्नमय कोश है ।।२०।। प्राणमयः कः ? प्राणादिपञ्चवायवो वागादीन्द्रियपञ्चकं च मिलित्वा प्राणमयः कोशः ।।२१।। प्राणमय कोश क्या है ? प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान; ये पञ्चप्राण और वागादि पञ्चकर्मेन्द्रियाँ इन को मिलाकर