भारतकोश
आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished51 पृष्ठ

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७ हैं। वाणी का देवता अग्नि, हाथ का देवता इन्द्र, पैर का देवता विष्णु, उपस्थ का देवता प्रजापति, गुदा का देवता मृत्यु है। वाणी का विषय भाषण, हाथ का विषय वस्तुग्रहण, पैर का विषय गमन, उपस्थ का विषय आनन्द तथा गुदा का विषय मलत्याग है।।१४।। कारणशरीरं किम्? अनिर्वाच्यानाद्यविद्यारूपं, शरीरद्वयस्य कारणभूतं सत् स्वस्वरूपाज्ञानं यदस्ति; तत् कारणशरीरम्।।१५।। कारण शरीर क्या है? अनिर्वचनीय-अनादिअविद्यारूप, दोनों शरीरों का कारण होता हुआ स्वरूप का अज्ञान जो है, वह कारण शरीर हैं। वह अज्ञान अनादि भावरूप और ज्ञाननिवर्त्य है। भावशब्द भी अभाव विलक्षण अर्थवाला है। अतः अज्ञान अभाव विलक्षण है ।।१५।। अवस्थात्रयं किम्? जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तयस्तिस्रोऽवस्थाः। जाग्रदवस्था का? श्रोत्रादिज्ञानेन्द्रियैः शब्दादिविषयो ज्ञायते इति यत्; तत् जाग्रदवस्था। स्थूलशरीरैतदवस्थाभिमान्यात्मा विश्व इत्युच्यते।।१६।। तीन अवस्थाएँ क्या है? जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्ति, यह तीन अवस्थाएँ है। श्रोत्रादि ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा शब्दादि विषय जो जाने जाते हैं, वही जाग्रत् अवस्था है। इस जाग्रत् अवस्था और स्थूलशरीर का अभिमानी आत्मा 'विश्व' कहा जाता है ।।१६।। स्वप्नावस्था का? जाग्रदवस्थायां यद्दृष्टं यच्छ्रतं, तज्जनित- वासनया निद्रासमये या प्रपञ्चप्रतीतिः; सा स्वप्नावस्था। सूक्ष्मशरीरस्वप्नावस्थाभिमान्यात्मा तैजस इत्युच्यते।।१७।।

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