भारतकोश
आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished51 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 51 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 8

६ सूक्ष्म शरीर क्या है ? अपञ्चीकृत पञ्चमहाभूतों से बना हुआ कर्मजन्य सुख-दुःखादि भोगों के साधन पञ्च ज्ञानेन्द्रियाँ, पञ्च कर्मेन्द्रियाँ, पञ्च प्राण, एक मन और एक बुद्धि, ऐसे सत्रह कलाओं के सहित जो रहता है, वह सूक्ष्म शरीर है ॥१२॥ पञ्चज्ञानेन्द्रियाणि कानि? श्रोत्रं, त्वक्, चक्षुः, रसना, घ्राणमिति पञ्चज्ञानेन्द्रियाणि। श्रोत्रस्य दिग्देवता, त्वचो वायुः, चक्षुषः सूर्यः, रसनाया वरुणः, घ्राणस्याश्विनाविति ज्ञानेन्द्रियदेवताः। श्रोत्रस्य विषयः शब्दग्रहणम्, त्वचो विषयः स्पर्शग्रहणम्, चक्षुषो विषयो रूपग्रहणम्, रसनाया विषयो रसग्रहणम्, घ्राणस्य विषयो गन्धग्रहणमिति ।। १३ ।। श्रोत्र, त्वचा, नेत्र, रसना और घ्राण, ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। श्रोत्र का देवता दिशा है, त्वचा का वायु, नेत्र का सूर्य, रसना का वरुण, घ्राण का अश्विनीकुमार, ये ज्ञानेन्द्रियों के देवता हैं। श्रोत्र का विषय शब्दग्रहण, त्वचा का विषय स्पर्शग्रहण, नेत्र का विषय रूपग्रहण, जिह्वा का विषय रसग्रहण तथा नासिका का विषय गन्धग्रहण है। यहाँ इन्द्रियों के कार्य को विषय शब्द से कहा गया है ।। १३ ।। कर्मेन्द्रियाणि कानि? वाक्पाणिपादपायूपस्थानीति पञ्चकर्मेन्द्रियाणि । वाचो देवता वह्निः, हस्तयोरिन्द्रः, पादयोर्विष्णुः, पायोर्मृत्युः, उपस्थस्य प्रजापतिरिति पञ्चकर्मेन्द्रियदेवताः। वाचो विषयो भाषणम्, पाण्योर्विषयो वस्तुग्रहणम्, पादयोर्विषयो गमनम्, पायोर्विषयो मलत्यागः, उपस्थस्य विषय आनन्द इति ।। १४ ।। वाणी, हस्त, पाद, उपस्थ तथा गुदा, यह पाँच कर्मेन्द्रियाँ