आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें५ एतत्साधनचतुष्टयसम्पन्नास्तत्त्वविवेकस्याधिकारिणो भवन्ति। तत्त्वविवेकःकः? आत्मा सत्यस्तदन्यत् सर्वं मिथ्येति ज्ञानमेव।।६।। उक्त साधनचतुष्टय से युक्त होने से ही तत्त्वविवेक के अधिकारी होते हैं। वह तत्त्वविवेक है क्या ? आत्मा सत्य है और उससे भिन्न सम्पूर्ण विश्व मिथ्या है, इसी ज्ञान को तत्त्वविवेक कहते हैं ।।६।। आत्मा कः? स्थूलसूक्ष्मकारणशरीराद्व्यतिरिक्तोऽवस्थात्रयसाक्षी पञ्चकोशातीतः सच्चिदानन्दस्वरूपो यस्तिष्ठति, स आत्मा।।१०।। आत्मा क्या है ? स्थूल, सूक्ष्म तथा कारण शरीर से भिन्न, अवस्थात्रय का साक्षी पञ्चकोशातीत जो सत्, चित्, आनन्द स्वरूप है, वही आत्मा है ।।१०।। स्थूलशरीरं किम्? पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतैः कृतं सत् कर्मजन्यं सुखदुःखभोगायतनमस्ति, जायते, वर्धते, विपरिणमतेऽपक्षीयते, विनश्यतीति षड्भावविकारैर्युक्तं यत्; तत् स्थूलशरीरम्।।११।। स्थूलशरीर क्या है? पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतों से बना हुआ कर्मजन्य सुख-दुःखादि भोगों के आयतन को स्थूल शरीर कहते हैं। अस्ति (व्यवहार योग्य होना), उत्पन्न होता है, बढ़ता है, रूपान्तर को प्राप्त होता है, घटता है और नष्ट हो जाता है, ऐसे छः विकारों से युक्त स्थूल शरीर है ।।११।। सूक्ष्मशरीरं किम्? अपञ्चीकृतपञ्चमहाभूतैः कृतं सत्, कर्मजन्यसुखादिभोगसाधनं ज्ञानेन्द्रियाणि पञ्च, कर्मेन्द्रियाणि पञ्च, प्राणादयः पञ्च, मनश्चैकं बुद्धिरेका; एवं सप्तदशकलाभिः सह तिष्ठति यत्, तत् सूक्ष्मशरीरम्।।१२।।