आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४ चन्दन, वनिता आदि समस्त भोग्य पदार्थों में तथा पारलौकिक स्वर्गभोग में इच्छाराहित्य ही वैराग्य है ॥५॥ शमादिषट्कसम्पत्तिः का? शमो दम उपरतिस्तितिक्षा श्रद्धा समाधानं चेति। शमादिषट्कसम्पत्ति क्या है ? शम, दम, उपरति, तितिक्षा, श्रद्धा और समाधान ॥६॥ शमः कः? अन्तरिन्द्रियनिग्रहः। दमः कः? बाह्येन्द्रियनिग्रहः। उपरतिः का? प्रपञ्चेभ्य उपरमणम्। तितिक्षा का? शीतोष्णादिद्वन्द्वसहिष्णुत्वम्। श्रद्धा का? गुरुवेदान्तवाक्येषु विश्वासः। समाधानं किम्? चित्तैकाग्रता।।७।। शम क्या है ? अन्तरिन्द्रिय (मन) का निग्रह शम कहा जाता है। दम क्या है? चक्षुरादि बाह्य इन्द्रियों का निग्रह। उपरति क्या है ? प्रपञ्चों से उपराम होना। कुछ विद्वानों का मत है कि अपने आश्रम धर्मों का अनुष्ठान ही उपरति है। तितिक्षा क्या है? शीत-उष्ण, सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों की सहनशीलता। श्रद्धा क्या है? गुरु तथा वेदान्त-वाक्यों में दृढ़ विश्वास श्रद्धा है। समाधान क्या है ? चित्त की एकाग्रता को समाधान कहते हैं ।।७।। मुमुक्षुत्वं किम्? मोक्षो मे भूयादिति दृढेच्छा।।८।। मुमुक्षा (मुमुक्षुत्व) क्या है ? मुझे मोक्ष प्राप्त हो, ऐसी दृढ़ इच्छा को मुमुक्षा कहते हैं। इच्छा में दृढ़ता का अर्थ है अन्य इच्छाओं का अभाव ।।८।।