आत्मबोध व तत्त्वबोध (आदि शङ्कराचार्य - हिन्दी व्याख्या सहित)
Atmabodha & Tattvabodha with Hindi Commentary
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: कैलाश आश्रम ऋषिकेश · कैलाश आश्रम ऋषिकेश (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३ एतेषां पञ्चतत्त्वानां तमोगुणप्रधानानां पञ्चीकरणेन पञ्चमहाभूतानि भवन्ति। इन तमोगुण प्रधान पञ्च तत्त्वों के पञ्चीकरण के द्वारा पञ्च महाभूतों की उत्पत्ति होती है पञ्चीकरणं कथम् ? एतेषु भूतेष्वेकमेकं भूतं द्विधा समं विभज्यैकमेकमर्द्धं तूष्णीं व्यवस्थाप्यापरमपरमर्द्धं चतुर्द्धा समं विभज्य स्वार्द्धभिन्नेष्वर्द्धेषु स्वभागचतुष्टयसंयोजनं पञ्चीकरणं भवति। एतेभ्यः पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतेभ्यश्चतुर्विधस्थूलशरीरं, ब्रह्माण्डं, ब्रह्माण्डमध्ये चतुर्दशभुवनानि सम्भूतानि।।३२।। प्रश्न- पञ्चीकरण किस प्रकार होता है ? उत्तर- एक-एक भूत के दो-दो समान विभाग कर एक-एक अर्धभाग को पृथक् सुरक्षित रखकर दूसरे-दूसरे आधे भाग को चार भागों में विभक्त कर अपने से भिन्न अर्ध भागों में अपने चार भागों को मिलाना पञ्चीकरण होता हैं। इन्हीं पञ्चीकृत पञ्च-महाभूतों से चतुर्विध स्थूल शरीर (जरायुज, अण्डज, स्वेदज और उद्भिज्ज), ब्रह्माण्ड और ब्रह्माण्ड के अन्तर्गत चतुर्दश भुवन का भेद-प्रभेद उत्पन्न होता हैं। चतुर्दश भुवनों में से भूः, भुवः, स्व, महः, जनः, तपः और सत्यं- ये उपर के सात लोक हैं तथा अतल, वितल, सुतलं, तलातल, रसातल, महातल, और पाताल-ये नीचे के सात लोक (भुवन) हैं ।।३२।। स्थूलशरीराभिमानि जीवनामकं ब्रह्मप्रतिबिम्बं भवति। स एव जीव आत्मन्येव प्रकृत्या जीवेश्वरभेददृष्टिं कल्पयति। कथमिति चेत्? अविद्योपाधिः सन्नात्मा जीव इत्युच्यते।।३३।।