भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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अमर लोक का विदेह नाम

काया नाम सबहिं गुण गवै, विदेह नाम कोई बिरला पावै॥ विदेह नाम पावेगा सोई, जिसका सद्गुरु साँचा होई॥

पाँच तीन यह साज पसारा, न्यारा शब्द विदेही हो। पाँच कहो तो छटवें हम हैं, आठ कहो नौ आई हो॥

पाँच तीन अधीन काया, न्यार शब्द विदेह हो। सुरति माहिं विदेह दरशै, गुरु मता निज एह हो॥

छिन इक ध्यान विदेह समाई॥ ताकी महिमा बरनिन न जाई॥ सार नाम सद्गुरु से पावे। नाम डोर गहि लोक सिधावे॥ सार शब्द विदेह स्वरूपा। निःअक्षर वह रूप अनुपा॥ तत्त्व प्रकृति भाव सब देहा। सार शब्द निःतत्त्व विदेहा॥

बावन अक्षर में संसारा। निःअक्षर सो लोक पसारा॥ सोई नाम है अक्षर बासा। काया ते बाहर परकासा॥

शब्द शब्द सब कोई कहे, वह तो शब्द विदेह। जिभ्या पर आवे नहीं, निरख परख के लेह॥

—साहिब कबीर जी

पिण्ड ब्रह्माण्ड और वेद कितेबै, पाँच तत्त्व के पारा। सतलोक यहाँ पुरुष विदेही, वह साहिब करतारा॥

—दादू दयाल