भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 112 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 37

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

37

बेल का कमाल

बेलगिरी को सुखाने के बाद कूट-पीसकर चूर्ण कर लें। यह दवा दिन में दो बार जल के साथ लें।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ ढाई ग्राम पिप्पल्यादि चूर्ण सुबह-शाम छाछ के साथ सेवन करें।
  • ❑ ढाई ग्राम हिंगवाष्टक चूर्ण मक्खन के साथ सेवन करें।

घाव में कीड़े हो गये हैं

नीम का कमाल

नीम की छाल और हींग की छाल को पीसकर लेप बना लें। यह लेप बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।

करौंदे का कमाल

करौंदे की जड़ को पानी के सहयोग से पीसकर तेल में डाल दें और आग पर रखें। जब पक जाए तो उतारकर कुछ ठंडा करके घाव वाली जगह लेप कर दें। बहुत ही लाभकारी औषधी है।

लहसुन का कमाल

लहसुन को पीसकर घाव वाली जगह पर लगाएँ।

घाव हो गया है

कंधी का कमाल

कंधी के पत्तों को गर्म करके घाव वाली जगह बाँधें।

तुलसी का कमाल

तुलसी के बीजों को पीसकर घाव वाली जगह लेप करके पट्टी बाँध दें।

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में) · पृष्ठ 37, कुल 112 में से · BharatKosha