आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
को एक-डेढ़ चम्मच शहद के साथ चाटें और ऊपर से बकरी का एक गिलास ताजा-ताजा दूध पी लें।
अन्य और सहायक उपचार
▯ सबसे पहले कब्ज को दूर करें। यह पथरी रोग की चिकित्सा का पहला जरूरी हिस्सा है।
▯ सुबह एक बड़े गिलास पानी में डेढ़ चम्मच शहद मिलाकर नित्य सेवन करें।
▯ नित्य सेब का रस पिएँ।
▯ छाछ का सेवन रोज करें।
▯ गाजर, खीरा और चुकन्दर का रस मिलाकर दिन में 2-3 बार पीएँ।
▯ रोज सुबह खाली पेट 55-60 ग्राम प्याज के रस का सेवन करें। करेले के रस का सेवन करें।
▯ 5 ग्राम पत्थर फोड़ी बूटी को पानी में डालकर उबालें और पी लें। यह दवा रोज लेना बहुत ही लाभकारी है।
▯ कुड़े की छाल को अच्छी तरह से पीस लें और फिर उसे दही में डालकर सेवन करें। यह बड़ा लाभकारी प्रयोग है।
▯ सहजन की सब्जी खाएँ।
▯ बेर पत्थर की पिछी में पाषाणभेद का चूर्ण मिलाकर गन्ने के रस के साथ सेवन करें।
▯ जब लगे कि पथरी के छोटे-छोटे कण बन रहे हैं और कभी-कभी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाते हैं तो ऐसा करें कि जब भी मूत्र आए तो उसे कुछ देर रोक लें। अब पानी गर्म करके टब में भर दें। इस टब में थोड़ी देर बैठने के बाद इसी में मूत्र करें। यह पथरी के छोटे-छोटे कणों को निकालने का सरह और लाभकारी उपाय है।