भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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पित्त की खराबी है

करेले का कमाल

करेले के पत्तों का रस निकालकर ही पिपैँ।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ केले पर घी डालकर खाना लाभकारी है।
  • ❑ शहतूत खाएँ।

पित्त ज्वर है

नीम का कमाल

नीम की छाल, धनिया, गिलोय, अंजीर लाल चंदन, पद्माक्ष-सब 3-3 ग्राम लेकर अच्छी तरह कूट-पीस लें। फिर उसे पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोगी को कुछ दिन पिलाएँ।

पीठ में दर्द है

कनेर का कमाल

कनेर के फूलों को एक पाव मीठे तेल में डेढ़ महीने के लिए डाल दें। डेढ़ महीने बाद उसमें जैतून का एक पाव तेल डालें और एक शीशी में उस तेल को डाल दें। इस तेल की मालिश करें।

पुराना कब्ज है

किशमिश का कमाल

28 ग्राम किशमिश, 3 मुनके, 1 अंजीर-तीनों को पौन गिलास पानी में रात के समय भिगो दें। सुबह अच्छी तरह मसलकर छान लें। अब उसमें दो-ढाई चम्मच शहद और एक नींबू का रस और आधा गिलास पानी और मिलाकर पी लें। यह बहुत ही लाभकारी दवा है।