भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

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साहिब बन्दगी

दो शब्द संगत की ओर से

अपने हरमन प्यारे सतगुरु जी के चरण कमलों में अर्पण दो शब्द जिन्होंने देश सेवा के समय बड़ी सादगी से फौज की डियूटी करते समय अपना जीवन बिताया। आप पहरावे में फौज की हरी वर्दी में रहते हुए रोजाना शाम को सत्यसंग देते थे।

आप आम सैनिकों की तरह फिल्म देखने अथवा घूमने-फिरने कभी नहीं जाते थे। हमेशा एक ही धुन में रहें, या तो साहिब के भजन गाते या सत्संग करते थे।

अब मानव कल्याण के लिए आपने पूर्ण तौर पर अपने आप को अर्पण किया है। सुबह साहिब के कुल्ले का दरवाजा खुलने से पहले ही लोग लम्बी-2 कतारों में खड़े हो जाते हैं वह इन्तजार में होते हैं कि कब दरवाजा खुले और बन्दगी करते समय अपने दुःख तकलीफों का साहिब जी से हल करवा सकें।

इसके बाद भी जब साहिब जी को देखा तो संगत में घिरे हुए और मुस्कराते हुए देखा। दिन में घंटों सत्संग करने के बाद आप संगत की सेवा में हर समय व्ययस्थ रहते। मानव सेवा ही उनकी जिन्दगी का लक्ष्य है। ऐसा सन्त सतगुरु फिर शायद ही मिले जो अपने हाथों से संगत का भोजन भी बना कर देता हो।

आप जी सत्संग में आने वाले लोगों को सर्गुण भक्ति जो कि खुले तौर पर मूर्ती पूजा, जल पूजा, अग्नि पूजा, मड़ीया व मट्ट ठू पूजा, यज्ञ और हवन आदि के बिना दूसरी निर्गुण भक्ति जोकि इस शरीर की कोशिकायों को मुद्राओं द्वारा जगाने वाली भक्ति का खण्डन करके निरंजन अथवा काल पुरुष की इस भूल-भुलईया से निकाल कर सत्य भक्ति की ओर ले जाने का प्रयास करते हैं।

शरीर की बनावट के बारे में साहिब जी बड़ी सहजता से बताते हैं कि पांच तत्व, 25 प्रवितियाँ और तीन गुण ही काल का रूप है इसीलिए आप काल पुरुष के काया के नाम को छोड़कर, शरीर को चलाने वाली चेतना (आत्मा) को नाम देते हैं जिसको आपने विदेह नाम कहा। प्रथम आप ही हैं जिसने संसार को काल पुरुष और दयाल पुरुष का भेद दिया है। विदेह नाम पाने वाले को कमाई की जरूरत नहीं पड़ती इसके कुछ नियम हैं जिसमें रहकर वह खुद-ब-खुद महत्त्मा बन जाता है।

1. सत्य बोलना 2. शाकाहारी रहना 3. नशा ना करना 4. पर स्त्री गमन ना करना 5. चोरी ना करना 6. जूआ ना खेलना 7. हक हलाल की कमाई करना।

अनथक सतगुरु जी ने बहुत थोड़े समय में 103 से ऊपर आश्रम बना कर लाखों लोगों को सतलोक की सत्य भक्ति में लगा दिया है। मगर यह समाज कल्याण का काम मीडिया वालों को नजर नहीं आता। साहिब जी के जाने के बाद स्कूलों और कॉलेजों में इस सदगुरु जी के बारे में पढ़ाया जायेगा और खोजें होंगी।

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