भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

पृष्ठ 94, कुल 112 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 94

94

साहिब बन्दशी

  • □ अत्यंत स्वच्छता से बना हुआ भोजन करें। रसोई में चप्पल का प्रयोग वर्जित कर दें।
  • □ आटा गूँथते समय मुँह और नाक को चुनरी से ढक लें।
  • □ स्नान किए बिना भोजन न बनाएँ।
  • □ किसी का जुटा बिलकुल मत खाएँ और न ही जुठी थाली में भोजन करें।
  • □ तौलिया, कंघी आदि भी जुटा न हो बल्कि अपना अलग होना चाहिए।
  • □ सोने का बिस्तर साफ-सुथरा होना चाहिए।
  • □ घर की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • □ मुँह ढाँपकर मत सोएँ।

स्नान में ध्यान दें

  • □ जब स्नान करें तो सबसे पहले सिर पर पानी डालें।
  • □ रात के समय स्नान मत करें।

सोने और जागने पर ध्यान दें

  • □ दिन में सोना ठीक नहीं है।
  • □ अधिक सोना भी ठीक नहीं है।
  • □ सुबह सूर्योदय से पहले जगने वाले कई रोगों से बचे रहते हैं।
  • □ सुबह चार बजे जगना उत्तम है।

ब्रश करने पर ध्यान दें

  • □ ब्रश करते समय दाँतों पर जोर से नहीं रगड़ें।
  • □ हो सके तो दातुन जरूर करें।
  • □ जो ब्रश आप कर रहे हैं, ध्यान दें कि उसके रेशे कोमल हों।