आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
DevanagariHindipublished112 पृष्ठ
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साहिब बन्दशी
- □ अत्यंत स्वच्छता से बना हुआ भोजन करें। रसोई में चप्पल का प्रयोग वर्जित कर दें।
- □ आटा गूँथते समय मुँह और नाक को चुनरी से ढक लें।
- □ स्नान किए बिना भोजन न बनाएँ।
- □ किसी का जुटा बिलकुल मत खाएँ और न ही जुठी थाली में भोजन करें।
- □ तौलिया, कंघी आदि भी जुटा न हो बल्कि अपना अलग होना चाहिए।
- □ सोने का बिस्तर साफ-सुथरा होना चाहिए।
- □ घर की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
- □ मुँह ढाँपकर मत सोएँ।
स्नान में ध्यान दें
- □ जब स्नान करें तो सबसे पहले सिर पर पानी डालें।
- □ रात के समय स्नान मत करें।
सोने और जागने पर ध्यान दें
- □ दिन में सोना ठीक नहीं है।
- □ अधिक सोना भी ठीक नहीं है।
- □ सुबह सूर्योदय से पहले जगने वाले कई रोगों से बचे रहते हैं।
- □ सुबह चार बजे जगना उत्तम है।
ब्रश करने पर ध्यान दें
- □ ब्रश करते समय दाँतों पर जोर से नहीं रगड़ें।
- □ हो सके तो दातुन जरूर करें।
- □ जो ब्रश आप कर रहे हैं, ध्यान दें कि उसके रेशे कोमल हों।