आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्राणायाम और योगासनों
द्वारा स्वास्थ्य रक्षा
वस्त्रिका प्राणायाम
पद्मासन या सुखासन या कैसे भी बैठकर कमर को सीधा रखें। धीरे-धीरे दोनों नथुनों से स्वांस अंदर भरें। स्वांस नाभि तक जाना चाहिए और पेट थोड़ा अंदर की ओर जाना चाहिए। छाती स्वांस से फूली हुई नजर आनी चाहिए। बिना रोके अब धीरे-धीरे स्वांस को बाहर निकालें। इस तरह 3 से 5 मिनट तक करें।
कपालभाती प्राणायाम
पद्मासन या सुखासन में बैठकर दोनों हाथ दोनों घुटनों पर ज्ञानमुद्रा (छोटी उँगली और अंगूठे को मिलाते हुए बाकी उँगलियाँ सीधी रखें) में रखें। अब सांस को बाहर छोड़ें। ऐसे में नाभि को पीछे झटका लगेगा। सांस लेना बिलकुल नहीं है। एक बार छोड़ने और दूसरी बार छोड़ने के बीच में जो अंतर आता है, वो अपने आप ही अंदर चला जाता है।
सांस इस प्रकार छोड़ना है, मानो नाक साफ कर रहे हों और पेट को झटना लग रहा हो। यह भी 4-5 मिनट तक कर सकते हैं।
अनुलोमविलोम प्राणायाम
दाएँ नथुने को दाएँ हाथ के अंगूठे से बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस ऊपर खींचें।
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