भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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साहिब बन्दगी

अब दाएँ हाथ की ही बीच वाली दो उँगलियों से बाएँ नथुने को बंद करते हुए दाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। ऐसे में अंगूठा हटा लें।

अब दाएँ नथुने से पहले की तरह धीरे-धीरे सांस खींचें। फिर दाएँ हाथ के अंगूठे से दाएँ नथुने को बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

इस तरह से एक चक्र पूरा होगा। ऐसे आप 5 से 15 मिनट तक करें।

ध्यान रहे, शुरू करते समय बाएँ नथुने से सांस खींचनी है और समाप्त करते समय भी बाएँ नथुने से ही सांस को बाहर छोड़कर खत्म करना है।

लाभ: हृदय, मेदा, अंतर्द्वियाँ, ज्विगर, फेफड़े, दिमाग, कैंसर, लीवर आदि से संबंधित जितनी भी बीमारियाँ हैं, सबमें ये बहुत लाभकारी हैं।

भुजंगासन की विधि

पेट के बल इस तरह लेटें कि आपका माथा जमीन को छू ले और टोड़ी छाती से लग जाए। पैरों को मोड़कर बाहर की ओर करें। टाँगें एक साथ जोड़े रखें। हाथों को कंधे के पास रखें।

अब धीरे-धीरे हाथों के सहारे सिर को ऊपर उठाते जाएँ, पर बाहों पर ज्यादा भार न पड़े। ऐसा करते हुए आप अंदर की ओर सांस लें। पेड़ स्थान (नाभि के नीचे का स्थान) जमीन के साथ लगा रहे, बाकी शरीर को ऊपर उठा लें। आँखों से 90° ऊपर देखने का प्रयास करें। ऊपर जितनी देर रुक सकें, रुकें और खास बात ध्यान दें कि ऊपर जितनी देर रुकें सांस को भी रोके रखें।

अब धीरे-धीरे नीचे वापिस लाते हुए सांस को भी धीरे-धीरे