भारतकोश
आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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से सांस लेते हुए वापिस साधारण स्थिति में आ जाएँ। यह प्रक्रिया दो-तीन बार कर सकते हैं।

लाभ :

  • ❑ टॉन्सिल ठीक करता है।
  • ❑ स्वांस संबंधी रोगों में लाभकारी है।

योग मुद्रासन की विधि

मृदासन में बैठ जाएँ। अब हाथों को पीछे पीठ पर ले जाएँ और एक हाथ से दूसरे की कलाई पकड़ लें। अब सांस को बाहर निकालते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकेँ और सिर को जमीन से लगा दें। कुछ देर इस स्थिति में रहकर सांस अंदर की ओर लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठें। कम-से-कम 3-4 बार यह प्रक्रिया कर लें।

लाभ :

  • ❑ तनाव को दूर करता है।
  • ❑ पाचन संबंधी रोगों में लाभकारी है।

पद्मासन की विधि

टॉगों को सामने की ओर फैलाकर बैठें। अब दाईं टॉग को बाईं जाँघ पर रखें और फिर बाईं टॉग को दाईं जाँघ पर रख लें। पैरों की एड़ियाँ पेट से लग जाएँ। कमर, सिर, गर्दन आदि बिलकुल सीधे रहें। हाथों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर गोद में रख लें अथवा घुटनों पर रख लें। जितनी देर इस स्थिति में रह सकें, रहें और फिर वापिस आने के लिए पहले एक टॉग को पकड़कर उतारें और फिर दूसरी को।

लाभ :

  • ❑ पाचन क्रिया को ठीक करता है।
  • ❑ जोड़ों के दर्द में लाभकारी है।