भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 198, कुल 486 में से

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पृष्ठ 198

१४६ | बौधायन-धर्मसूत्रम् | [ अनध्यायः

तस्य राष्ट्रे वसन् तन्मरणदिवसेऽपि । एकः तीर्थः गुरुः ययोरिति विग्रहः । एतेष्वहोरात्रं नाऽधीयीतेति ॥ ६ ॥

वाते पूतिगन्धे नीहारे नृत्तगीतवादित्ररुदितसामशब्देषु तावन्तं कालम् ॥ ७ ॥

**अनु०—**वेगपूर्वक वायु के बहने, दुर्गन्ध आने, ओस गिरने, नृत्य होने, गीत और वाद्ययन्त्र की ध्वनि सुनाई पड़ने, रोने की ध्वनि आने पर या साम का गान सुनाई पड़ने पर उतने समय तक अनध्याय होता है, जब तक ये घटनायें होती रहती हैं ॥ ७ ॥

वातो वायुः दिवा चेत्पांशुगन्धहरः । नक्तं चेत् कर्णश्रावी । पूतिगन्धो दुर्गन्धः । नीहारो हिमप्रावरणम् । ( तच्च हिमानी ) तत्राऽऽहिमात् तावदनध्यायः । वादित्रं वीणावादनम् । यावदेतानि निवर्तन्ते तावदनध्यायः ॥ ७ ॥

^१स्तनयित्नुवर्षविद्युत्सन्निपाते त्र्यहमनध्यायोऽन्यत्र ^२वर्षाकालात् ॥ ८ ॥

**अनु०—**मेघगर्जन, बिजली की चमक तथा वर्षा के एक साथ होने पर, वर्षाकाल से अन्य समय में तीन दिन का अनध्याय होता है ॥ ८ ॥

स्तनयित्नुर्मेघगर्जितम् । विद्युत्तडित् । अप्रमुष्टमन्यत् ॥ ८ ॥

वर्षाकालेऽपि वर्षवर्जमहोरात्रयोश्च तत्कालम् ॥ ९ ॥

**अनु०—**वर्षाकाल में भी मेघगर्जन और बिजली की चमक साथ-साथ होने पर दूसरे दिन या दूसरी रात के उसी समय तक का अनध्याय होता है ॥ ९ ॥

**टि०—**गोविन्द स्वामी के अनुसार रात्रि या दिन की समाप्ति तक ही अनध्याय होता है ।

वर्षाकालेऽपि विद्युत्स्तनयित्नुसन्निपातेऽहनि चेदास्तमयादनध्यायः । रात्रौ चेद्दोषसः ॥ ९ ॥

^३पित्र्यप्रतिग्रहभोजनयोश्च तद्दिवसशेषम् ॥ १० ॥

**अनु०—**श्राद्ध के अवसर पर दान लेने या भोजन करने पर दिन के शेषभाग में अनध्याय रहता है ॥ १० ॥


१. See. आप. ध. १.११.२३. २. वार्षिकात् इति क. पु.
३. cf. आप. ध. १.११.२२.