बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंएकविंशः खण्डः ] प्रथमप्रश्ने एकादशोऽध्यायः १४५
अनु०—जो नारी धन देकर खरीदी गयी होती है वह पत्नी नहीं होती । वह न तो दैवकार्यों में सहधर्मिणी हो सकती है और न पित्र्यकर्मों में । कश्यप ने ऐसी नारी को दासी बताया है ॥ ४ ॥
क्रीताया वेदोक्तकर्मण्यधिकारो नास्तीत्यर्थः ॥ ४ ॥
कन्याविक्रयोऽपि न कर्तव्य इत्याह—
शुल्केन ये प्रयच्छन्ति स्वसुतां लोभमोहिताः ।
आत्मविक्रयिणः पापाः महाकिल्बिषकारकाः ॥
पतन्ति नरके घोरे घ्नन्ति चाऽऽसप्तमं कुलम् ।
गमनागमनं चैव सर्वं शुल्को विधीयते ॥ ५ ॥
अनु०—जो अधम व्यक्ति लोभाभिभूत होकर धन लेकर पुत्री को ( विवाह के लिए ) देते हैं, वे स्वयं अपना ही विक्रय करते हैं, अत्यन्त पापी होते हैं, वे घोर नरक में गिरते हैं और अपने वंश की सातवीं पीढ़ी तक को नष्ट कर देते हैं। वे बार-बार जन्म लेते हैं और मरते हैं, ये सभी दोष कन्या के बदले धन लेने पर उत्पन्न बताये गये हैं ॥ ५ ॥
कन्याविक्रयी कुत्सितजन्मभाग्भवति, अधःपाती च । तस्मात्कन्याविक्रयो न कर्तव्य इत्यर्थः ॥ ५ ॥
ब्राह्मादिविवाहोत्पन्नानां पुत्राणां वेदस्वीकरणे शक्तिरित्युक्तम् । तत्राऽविघ्नेन वेदस्वीकरणायाऽनध्ययनप्रकरणमारभ्यते—
पौर्णमास्यष्टकामावास्याग्न्युत्पातभूमिकम्पश्मशानदेशपतिश्रोत्रियैकतीर्थप्रायणेष्वहोरात्रमनध्यायः ॥ ६ ॥
अनु०—पौर्णमासी को, उसके बाद की अष्टमी को, अमावस्या को, गांव में अग्निदाह होने पर, भूमिकम्प होने, श्मशान में जाने पर, देश के राजा, विद्वान् ब्राह्मण, या अपने ही गुरु से विद्या ग्रहण किये हुए सतीर्थ के मरने पर एक दिन और रात के लिए वेद का अनध्याय होता है ॥ ६ ॥
पौर्णमासी तिथिः यस्यां चन्द्रमाः पूर्ण उत्सर्पेत् । अष्टका पौर्णमास्या उपरिष्टादष्टमी । अमावास्या अमा सह सूर्येण यस्यां तिथौ चन्द्रमा भवति सा । अग्न्युत्पातः यस्मिन् ग्रामे गृहदाहस्तस्मिन् ग्रामे । भूमिकम्पो भुजञ्चलनम् । श्मशानं शवशयनम्, शरीरस्य दहनभूमिः निक्षेपभूमिर्वा । तत्र गमनदिवसेऽपि प्रायणं मरणम् । तच्च देशपत्यादिभिः प्रत्येकमभिसम्बध्यते । देशपती. राजा
१३ बौ० ध०