भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 235, कुल 486 में से

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पृष्ठ 235

तायः खण्डः ] द्वितीयप्रश्ने द्वितीयोऽध्यायः

एवं समानवर्णस्त्रीपुत्रविषयो विभाग उक्तः। अथ—

नानावर्णस्त्रीपुत्रसमवाये दायं दशांशान् कृत्वा चतुरस्त्रीन् द्वावे-
कमिति यथाक्रमं विभजेरन् ॥ १० ॥

अनु०—यदि अनेक वर्ण की स्त्रियों से उत्पन्न अनेक पुत्र हों तो सम्पत्ति का दश भाग कर, स्त्री के वर्ण-क्रम के अनुसार पुत्रों को चार, तीन, दो और एक भाग मिलता है। १० ॥

टि०—ब्राह्मणी का पुत्र चार भाग, क्षत्रिया से उत्पन्न पुत्र तीन भाग, वैश्या से उत्पन्न पुत्र दो भाग तथा शूद्रा से उत्पन्न पुत्र एक भाग प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार क्षत्रिय अपनी सम्पत्ति का छः भागकर अपनी क्षत्रिया, वैश्या, शूद्रा पत्नियोंके पुत्रों को क्रमशः तीन, दो और एक भाग बाँटता है; वैश्य अपनी सम्पत्ति का तीन भाग कर वैश्या से उत्पन्न पुत्रों को दो भाग तथा शूद्रा पत्नीसे उत्पन्न पुत्रों को एक भाग दे।

नानावर्णस्त्रियो ब्राह्मणादिखियः। तत्पुत्रसमवाये सति सर्वं दशधा विभ-
ज्य चतुरोंऽशान् ब्राह्मणीपुत्रो हरेत्। इतरेषु षट्सु त्रीनंशान् क्षत्रियासुतः। तत्परि-
शिष्टेषु त्रिषु द्वौ वैश्यासुतः। तायैतदविशिष्टांशं शूद्रासुतः। एवं क्षत्रियोऽपि सुत-
स्य वर्णक्रमात् षोढा कृतानां त्रीन् द्वावेकमिति यथाक्रमं प्रकल्पयेत्। तथा
वैश्योऽपि स्वपुत्रयोः द्वावेकमिति विभजेत् ॥ १० ॥

अथौरसविषयविभागः—

औरसे तूत्पन्ने सवर्णास्तृतीयांशहराः ॥ ११ ॥

अनु०—औरस पुत्र के उत्पन्न होने पर अन्य सवर्ण पुत्र सम्पत्ति का तृतीय अंश प्राप्त करते हैं ॥ ११ ॥

टि०—औरस पुत्र पति द्वारा अपनी सवर्णा पत्नी से स्वयं उत्पादित पुत्र को कहते हैं। यदि किसी पुरुष का औरस पुत्र उत्पन्न होता है तो उसके अन्य सवर्ण पुत्र पूरी सम्पत्ति के तृतीय अंश में ही अपना हिस्सा पाते हैं। गोविन्दस्वामी की व्याख्या में 'सवर्णाः' के स्थान पर “असवर्णाः” ग्रहण किया गया है अर्थात् औरस सवर्ण पुत्र उत्पन्न होने पर अन्य वर्ण की पत्नियों से उत्पन्न पुत्र पूरी सम्पत्ति के तृतीय अंश में भी छः भाग कर वर्णानुसार तीन, दो, एक अंश ग्रहण करें।

औरसं सवर्णापुत्रं वक्ष्यति—'सवर्णायां संस्कृतायाम्' इति। तस्मिन्नु-
त्पन्नेऽसवर्णास्तृतीयांशहरा भवेयुः। सर्वं धनजातं त्रेधा विभज्य तेषामेकं
षोढा सम्पाद्य त्रीन् द्वावेकमिति कल्पयेत् ॥ ११ ॥