भारतकोश
बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

Baudhayana Dharmasutra Hindi

महर्षि बौधायन द्वारा

स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)

DevanagariHindipublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 320, कुल 486 में से

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२६८बौधायन-धर्मसूत्रम्[ श्राद्धविधिः

सन्ध्याकालीन भोजन के बीच कभी भोजन नहीं करता वह सदा उपवास करने वाले के समान ही होता है ॥ १२ ॥

कालयोरन्तराऽनशनं तदुपवासफलं भवेत् । अतश्च नाऽन्तरा भोजनं कर्तव्यम् ॥ १२ ॥

प्राणाग्निहोत्रमन्त्रांस्तु निरुद्धे भोजने जपेत् ।
त्रेताग्निहोत्रमन्त्रांस्तु द्रव्यालाभे यथा जपेदिति ॥ १३ ॥

**अनु०—**जिस प्रकार यज्ञ की वस्तुओं के अभाव में तीनों अग्नियों से संबद्ध अग्निहोत्र के मन्त्रों का जप किया जाता है, उसी प्रकार भोजन न उपलब्ध होने पर प्राणाग्नि होत्र के मन्त्रों का जप करना चाहिए ॥ १३ ॥

निरुद्धे भोजने व्याध्यादिना द्रव्यासमम्भवेन वा तदानीं 'भूर्भुवस्स्वः' इत्यादीन् प्राणाहूतिमन्त्रान् वा जपेत् ॥ १३ ॥

¹एवमेवाऽऽचरन् ब्रह्मभूयाय कल्पते ब्रह्मभूयाय कल्पत इति ॥ १४ ॥
इति द्वितीयप्रश्ने त्रयोदशः खण्डः॥

**अनु०—**इस प्रकार आचरण करने वाला ब्रह्म के साथ तादात्म्य प्राप्त कर लेता है।

ब्राह्मणो ब्रह्म तद्भूयं तद्भावः ॥ १४ ॥

इति श्रीगोविन्दस्वामिकृते बौधायनधर्मविवरणे द्वितीयप्रश्ने सप्तमोऽध्यायः।


द्वितीयप्रश्ने अष्टमोऽध्यायः

चतुर्दशः खण्डः

येन विधिना स्वयं भुञ्जीत तत्प्रतिपादयितुमधुना परभोजनं कारयितुं काम्यस्य विधानमुच्यते । द्विविधं भवत्यतिथिभोजनं श्राद्धभोजनं च । तदिदानीं श्राद्धमुच्यते--

पित्र्यमायुष्यं स्वर्ग्यं प्रशस्यं पुष्टिकर्म च ॥ १ ॥

**अनु०—**पितृदेवताओं के लिए श्राद्ध कर्म दीर्घ आयु प्रदान करने वाला, स्वर्ग देने वाला, प्रशंसनीय तथा समृद्धि का कारण होता है ॥ १ ॥


१. "उत्तम एवमेव" इति ख. ग. घ. पुस्तकेषु सूत्रपाठः ।

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