बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें| ३७२ | बौधायन-धर्मसूत्रम् | [ विविधप्रायश्चित्तानि |
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ऋग्भिस्तरत्समन्दीयैर्मार्जनं पापशोधनम् ॥ ५ ॥
अनु०— किन्तु जिन वस्तुओ का भोजन निषिद्ध है, उनका भोजन करने पर और जिन व्यक्तियों के अन्न का भोजन निषिद्ध है उनके अन्न का भोजन करने पर तरत्समन्दीय ऋचाओं के उच्चारण के साथ जल से मार्जन करने पर पाप से शुद्धि हो जाता है ॥ ५ ॥
प्रायश्चित्तेषु भूयो विधिना व्याख्यातमेतत् । पुनर्वचनप्रयोजनम् - पूर्वाध्यायनिर्दिष्टेषु प्रायश्चित्तेष्विह वक्ष्यमाणेषु यानि समानि तान्यविरोधीनि समुच्चीयन्ते, विरोधीनि तु विकल्प्यन्ते । प्रतिग्रहोष्यमाणस्त्विति अप्रतिग्राह्यमिति शेषः । परिवेदनम'वर्त्तनम् । ऋचः तरत्समन्द्योऽप्सि'ति केचित्पठन्ति । तरत्समन्दीत्यादिभिरेव मार्जनं उदकाञ्जलिना शिरस्यभिषेकः ॥१-५॥
भ्रूणहत्याविधिस्त्वन्यः तं तु वक्ष्याम्यतः परम् ।
विधिना येन मुच्यन्ते पातकेभ्योऽपि सर्वशः ॥ ६ ॥
अनु०— अब हम यहाँ से विद्वान् ब्राह्मण की हत्या के प्रायश्चित्त की विधि बताएगे जिस विधि से मनुष्य सभी प्रकार के पातको से सर्वथा मुक्त हो जाते हैं ।६।
अयमन्यो भ्रूणहत्याविधिरित्यर्थः । तमावेष्टयति-विधिना येनेति ॥ ६ ॥
प्राणायामान् पवित्राणि व्याहृतीः प्रणवं तथा ।
जपेदघमर्षणं युक्तः पयसा द्वादश क्षपाः ॥ ७ ॥
अनु०— प्राणायाम, पवित्र करने वाले वैदिक मन्त्रादि, व्याहृतियों, ओंकार तथा अघमर्षण मन्त्रों का बारह रात्रियों तक योगाभ्यास करते हुए, तथा केवल दुग्धाहार करते हुए जप करे ॥ ७ ॥
जपेदिति प्राणायामादिषु प्रत्येकं संबध्यते । अत एव न तेषां समुच्चयः। युक्तो ब्रह्मचर्यादिभिः, योगयुक्तो वा । पयसा वर्तमानः द्वादशरात्रीनैरन्तर्येण जपेत् ॥ ७ ॥
त्रिरात्रं वायुभक्षो वा क्लिन्नवासाऽऽप्लुतश्शुचिः ॥ ८ ॥
अनु०— अथवा तीन रात्रियों तक गीले वस्त्रों को पहने हुए कोई आहार न कर केवल वायु पीकर रहते हुए ( जप करने पर ) शुद्धि हो जाती है ॥ ८ ॥
क्लिन्नवासाः आर्द्रवासाः ॥ एवंभूतो वा पूर्वोक्तानामन्यतमं जपेत् । शक्त्यपेक्षश्चाऽसौ विकल्पः ॥ ८ ॥
प्रतिषिद्धांस्तथाऽऽचारानभ्यस्याऽपि पुनः पुनः ।