बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
पृष्ठ 434, कुल 486 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३८० | बौधायन-धर्मसूत्रम् | [अविज्ञातप्रायश्चित्तानि |
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अनु०— जो व्यक्ति जल में खड़ा होकर तीन बार "द्रुपदादिवेन्मुमुचानः । स्विन्नस्स्नात्वी मलादिव । पूतं पवित्रेणेवाऽज्यमापश्शुन्धन्तु मैनसः" पाठ करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥ ४ ॥
वामदेवः काण्डर्षिर्वा अनुष्टुप्छन्दः आपो देवता ॥ ४ ॥
$^३$"हँसश्शुचिष दि"त्येतामृचं त्रिरन्तर्जले पठन् सर्वस्मात्पापात्प्रमुच्यते ॥ ५ ॥
अनु०— जो व्यक्ति जल में खड़ा होकर तीन बार "हंसश्शुचिषदसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत् । नृषद्वरसहत सद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् (तैत्तिरीय संहिता, ४.२.१) पाठ करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥ ५ ॥
वामदेवजगतौसूर्या ऋषिच्छन्दोदेवताः ॥ ५ ॥
अपि वा सावित्रीं गायत्रीं पच्छोऽर्द्धर्चशस्ततः समस्तामित्येतामृचं त्रिरन्तर्जले पठन् सर्वस्मात्पापात्प्रमुच्यते ॥ ६ ॥
अनु०— जो जल में खड़ा होकर सवितृ देवता के गायत्री मन्त्र के प्रत्येक चरण का अलग-अलग, अर्द्धर्च-अर्द्धर्च का अलग-अलग और फिर सम्पूर्ण मन्त्र का तीन बार पाठ करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥ ६ ॥
विश्वामित्रार्षं गायत्रीच्छन्दस्सविर्तो देवता ॥ ६ ॥
अपि वा व्याहृतीर्व्यस्ताः समस्ताश्चेति त्रिरन्तर्जले पठन् सर्वस्मात्पापात्प्रमुच्यते ॥ ७ ॥ अपि वा प्रणवमेव त्रिरन्तर्जले पठन् सर्वस्मात्पापात्प्रमुच्यते ॥ ८ ॥
अनु०— जो व्यक्ति जल में खड़ा होकर तीन बार व्याहृतियों का अलग-अलग और एक साथ उच्चारण करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥ ७ ॥
अनु०— जो व्यक्ति जल में खड़ा होकर ओंकार का ही तीन बार उच्चारण करता है वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है ॥ ८ ॥
विवृते एते च सूत्रे ॥ ७, ८ ॥
३. हंसश्शुचिषदसुरन्तरिक्षमद्धोता वेदिषदतिथिर्दु'रोणसत् । नृषद्वरसद्दतसद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् ॥ ( तै० सं० ४. २, १ ) ।