बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 463, कुल 486 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 463
परिशिष्टम्
'विवरण' में उद्धृत वाक्यों का सन्दर्भ-निर्देश
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| अकारं चाप्युकारं च | मनु. २. ७६ | ३०२ |
| अक्षय्यं ह व चातुर्मास्य- | आप. श्रौ. ८. १. १. | २७ |
| अर्के चेन्मधु विन्देत | शाबरभाष्य १. २. ३४. | २४९ |
| अङ्गादङ्गात्सम्भवसि | तै. मं. सं. २. १४. | १७३ |
| अङ्गुष्ठमात्रं पुरुषं | महा. भा. व. २९७. १७. | २६३ |
| अङ्गुष्ठानासिकाभ्यान्तु | हारीत. स्मृ. ४. ३७ | ५२ |
| अग्नयेऽंहोमुचे | तै. सं. ७. ५. २२. | ३९४ |
| अग्नये पवमानाय | तै. सं. २. २. ४. | ३९४ |
| अग्नये स्वाहा | तै. मं. सं. १. १. | ३४३ |
| अग्नि जलं वा | या. स्मृ. १. ९८. | ७२ |
| अग्निं होतारम् | ऋ. सं. ३. १. १९. | २७१ |
| अग्निश्च मा मन्युश्च | याज्ञिकी. ३९. | २२४ |
| अग्निहोता | तै. आ. ३. ३. | २०५ |
| अग्नेऽभ्यावर्त्तिन् | तै. सं. ४. २. १. | ३३६ |
| अग्ने नय | तै. ब्रा. २. ८. २. | ४०० |
| अग्नेर्मन्वे | तै. सं. ४. ७. १५. | ४०० |
| अग्ने युक्ष्वाहि | ऋ. सं. ४. ५. २९. | २७१ |
| अग्ने रक्षाहः | ऋ. सं. ५. २. २०. | २७१ |
| अतिथिपूजाहानाच्च | २७८ | |
| अतोऽन्यतममास्थाय | मनु. ११. ८६. | १५९ |
| अन्नाह गोरमन्वत | तै. ब्रा. १. ५. ८. | ३४७ |
| अथ ब्रह्म वदन्ति | १०० | |
| अथाऽऽचामेत् | व. ध. २३. १९. | २२४ |
| अथाऽभ्यादधातीध्मं | आप. श्रौ. ७. ६. ४. | १०६ |
| अथैते प्राहुऋक्संहितम् | शौनकः | ३५४ |
| अग्निरैव काञ्चनम् | व. ध. ३. ५७. | ५४ |
| अध्यापनयोजनप्रतिग्रहाः | गौ. ध. ७. ३. | २०१ |
| अर्धप्रसृतिमात्रा तु | दक्ष. स्मृ. ५. ७. | ६८ |
| अनाश्रमी न तिष्ठेत | दक्ष. स्मृ. १. १०. | ३४ |
| अनिश्चयो भिक्षुः | गौ. ध. ३. ११. | २५१ |
| अनुपनीतसहभोजने | गृत्समदः | १० |
३० बौ०ध०