बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
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४१२ बौधायन-धर्मसूत्रम्
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| ऋषयो दीर्घसन्ध्यत्वात् | मनु. ४. ९४. | २३० |
| एका लिङ्गे गुदे तिस्रः | मनु. ५. ३६. | ६८ |
| एका लिङ्गे तिस्रो वामे | व. ध. ६. १६. | ६८ |
| एकोऽपि वेदवित् | मनु. १२. ११३. | ५ |
| एतदक्षरमेताञ्च | मनु. २. ७८. | २२७ |
| एतदेव व्रतं कुर्युः | मनु. ११. १९७. | १३४ |
| एतदेव विपरीतं | तै. आ. २. १. | ४७ |
| एतत् खलु वाव तपः | तै. सं. ६. १. ६. | २७८ |
| एनदद्युमन्तः प्रभूतः | बौ. गृ. १. १. १. | ३०९ |
| एनपा द्वितीया | पा. सू. २. ३. ३१. | ११५ |
| एनबन्यतरस्याम् | पा. सू. ५. ३. ३५ | ११५ |
| एषां त्रिरात्रमभ्यासात् | याज्ञ. स्मृ. ३. ३२२ | ३९० |
| एष्टव्या बहवः पुत्राः | बृह. स्मृ. १. २. | २७९ |
| ऐकाश्रम्यन्त्वाचार्याः | गौ. ध. ३. ३६. | २६१ |
| ओंकारश्चाथशब्दश्च | २२२ | |
| ओं भूः ओं भुवः | याज्ञिकी ४२. | २२८ |
| ओं होतः | बो. श्रौ. १२. १६. | ३०१ |
| ओमापो ज्योतिः | याज्ञिकी ४२. | २२८ |
| कराभ्यां तोयमादाय | व्यासः | २२६ |
| कवारितर्यदङ्घ्रिवोपतिष्ठते | तै. सं. १. ५. ९. | १६५ |
| कर्तृकर्मणोः कृति | पा. सू. २. ३. ६५. | ३ |
| कर्मणैव हि संसिद्धि | भगवद्गीता. ३. २०. | २५५ |
| कर्मयोग्यो जनो नैव | ४१ | |
| कर्मादिष्वेतेर्जुहुयात् | तै. आ. २. ७. | ३३८ |
| कात्यायनाय | तै. आ. १०. १. ७. | ३७८ |
| कामकारकृतेऽपि | मनु. ११. ४५. | १५५ |
| कामतो ब्राह्मणवधे | मनु. ११. ८९. | १५५ |
| कामं मातापितरौ चैनम् | १४९ | |
| कामोदकं सपिण्डता | याज्ञ. स्मृ. ३. ४. | ८० |
| कालाध्वनोरत्यन्तसंयोगे | पा. सू. २. ३. ५. | ३६१ |
| (१)कुणपरेतोऽसृङ्मूत्रपुरीष- | शङ्खः | ५६ |
| कुमारजन्मदिवसं | वृद्धमनुः | ७८ |
| कुर्वन्नेवेह कर्माणि | ई. उ. २. | २५४ |
| कुशोदकं दधि | याज्ञ. स्मृ. ३. ३१४. | ३८० |
| कुश्नक्रोशो शूद्रहत्या | १३५ | |
| कृच्छ्रे, वापनं व्रतं चरेत् | गौ. ध. २७. २. ३. | ३४१ |
| कृत्यल्युटो बहुलम् | पा. सू. ३. ४. ११३. | २५२ |