बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 465, कुल 486 में से
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परिशिष्टम्
४११
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| आचार्यकुलाद्वेदमधीत्य | छा. उ. ८. १५. १. | १८ |
| आच्छाद्य चार्चयित्वा | मनु. ३. २७. | १४० |
| आच्छेत्ता ते मारिषम् | त. सं. १. १. २. | ११४ |
| आत्मा ज्ञातव्य इत्येतत् | श्लो. वा. पृ. ६६१. श्लो. १०३. | २५७ |
| आदित्यो ब्रह्म | छा. उ. ३. १९. १. | २२७ |
| आदित्योऽग्नि | ऐ. ब्रा. ४०. ५. | ४२ |
| आपद्विहितैः कर्म्मभिः | उशनाः | ३५७ |
| आस्नानं तीर्थं क इह प्रवोचत | ऋ. सं. ८. ६. १७. | ११८ |
| आपो हिष्ठा | तै. सं. ५. ६. १. | २२५ |
| आयुर्विप्रापवादेन | मनु. ४. २३७. | २७८ |
| आयुर्दा देव जरसं | तै. मं. सं. २. २. १. | ३२ |
| आयुष्ये | तै. आ. २. ५. | ३३५ |
| आशयेष्वन्नशेषान् | बो. गृ. २. ११. ४२. | २७६ |
| आश्रमसमुच्चयं द्वितीयं | २६० | |
| आसामन्यतमां गत्वा | नार. स्मृ. १२. ७५. | १७० |
| आहवनीये सभ्यावसथ्ययोः | बो. श्रौ. २. ७. | २९५ |
| आहिताग्निश्चेत् | व. ध. ४. ३०. | २०१ |
| आहिताग्नेर्विनीतस्य | व. ध. २५. २. | ३७६ |
| इतरेभ्यो बहिर्वेदि | मनु. ११. ३. | २१३ |
| इतिहासपुराणं | छा. उ. ७. १. २. | ३७७ |
| इन्द्रं नरः | साम. सं. पू. ४. १. | ३५९ |
| इन्द्राय स्वाहा यमाय | ३४४ | |
| इमं मे वरुण | तै. सं. २. १. ११. | २२५ |
| इमं स्तोममर्हते जातवेदसे | तै. मं. सं. २. ७. | ३२ |
| उताऽसि मैत्रावरुणः | ऋ. सं. ५. ३. २४. | ८६ |
| उदके मध्यरात्रे च | मनु ४. १०९. | १५१ |
| उदगयन आपूर्यमाणपक्षे | आश्व. गृ. १. ३. १. | २० |
| उदुत्यम् | तै. सं. १. ४. ४३ | ३४७ |
| उद्दीप्यस्व जातवेदः | तै. मं. सं. १. १. | ३९ |
| उद्यन्तमस्तं यन्तं | तै. आ. २. २. | २२३ |
| उद्वयं तमसस्परि | तै. सं. ४. १. ७. | ३४७ |
| उपासने गुरूणां | आप. ध. १. १५. १. | ४७ |
| उपास्मै गायता नरः | साम. सं. उ. १. २. | ३५९ |
| उभयत्र दशाऽहानि | वृद्धमनुः | ७८ |
| उरवेऽन्तरिक्षाय | ३४४ | |
| ऋतञ्च सत्यञ्च | याज्ञिकी ८. | २३९ |
| ऋतुस्स्वाभाविकस्त्रीणाम् | मनु. ३. ४६. ४७. | १८० |