बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 47, कुल 486 में से
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विषयानुक्रम
प्रथम प्रश्न
प्रथम अध्याय
| विषय | पृ० | विषय | पृ० |
|---|---|---|---|
| धर्म वेदविहित एवं स्मार्त | १ | धातु निर्मित पदार्थों की शुद्धि | ५५ |
| शिष्ट का लक्षण | ३ | चमस की पवित्रता | ५७ |
| परिषत् के सदस्य | ४ | शुद्धि के साधन | ५७ |
| दक्षिण तथा उत्तर के धर्म | ८ | नित्य शुद्ध वस्तुएँ | ५९ |
| आर्यावर्त्त का विस्तार | १२ | पुष्प एवं फल की शुद्धता | ६० |
| सङ्कीर्णयोनियों के प्रदेश | १३ | शुद्ध वस्तुएँ | ६१ |
| देशयात्रा का प्रायश्चित्त | १४ | शुद्धि के उपाय | ६२ |
| वेदब्रह्मचर्य की अवधि | १६ | देवपूजन में श्रद्धा का महत्त्व | ६५ |
| अग्नि के आधान का काल | १८ | प्रक्षालन का नियम | ६७ |
| उपनयन संस्कार | १९ | ब्याज का नियम | ७० |
| ब्रह्मचारी के कर्त्तव्य | २१ | वर्ण की हानि | ७२ |
| पादोपसङ्ग्रहण | २३ | अशौच के नियम | ७७ |
| अभिवादन के नियम | २५ | उदकदान का विचार | ७९ |
| उच्छिष्ट-भोजन | २६ | सकुल्य | ८१ |
| गुरु का वर्णव्यतिक्रम | २७ | सम्पत्ति का उत्तराधिकार | ८२ |
| द्वितीय अध्याय | जन्म एवं मृत्यु का आशौच | ८४ | |
| उपदेशयोग्य शिष्य | ३० | अस्पृश्य व्यक्ति एवं वस्तु | ९१ |
| ब्रह्मचर्य दीर्घसत्र रूप में | ३१ | मांसभक्षण में अभक्ष्य | ९३ |
| तृतीय अध्याय | भक्ष्य पशु | ९५ | |
| स्नातक के वस्त्रादि | ३५ | भक्ष्य मत्स्य | ९६ |
| स्नातक के कर्त्तव्य | ३६ | पेय एवम् अपेय दूध | ९७ |
| चतुर्थ अध्याय | षष्ठ अध्याय | ||
| कमण्डलु का महत्त्व | ३८ | पवित्रता का महत्त्व | ९९ |
| जलग्रहण की विधि | ४१ | यज्ञिय वस्त्र | १०२ |
| पञ्चम अध्याय | भूमि की शुद्धि | १०४ | |
| शुद्धि के साधन | ४५ | पात्र की अशुद्धि | १०८ |
| यज्ञोपवीतधारण की विधि | ४६ | गोविकार की पवित्रता | ११० |
| आचमन की विधि | ४८ | सप्तम अध्याय | |
| पात्रों की शुद्धि | ५३ | यज्ञ के सामान्य नियम | ११३ |
| वस्त्रों की शुद्धि | ५५ | दीक्षित के कर्त्तव्य | १२० |
| अष्टम अध्याय | |||
| ब्राह्मण की पत्नियाँ | १२१ | ||
| सवर्ण पुत्र | १२२ |