बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
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| विषय | पृ० | विषय | पृ० |
|---|---|---|---|
| प्रतिलोमज पुत्र | १२३ | द्वितीय अध्याय | |
| नवम अध्याय | आचार-नियम | १८० | |
| पुत्रों के प्रकार | १२५ | सम्पत्ति का विभाजन | १८१ |
| ब्रात्य सन्तान | १२७ | पुत्र के भेद | १८४ |
| दशम अध्याय | पत्नी की रक्षा का महत्त्व | १९० | |
| कर का अंश | १२७ | पुत्री का धन | १९२ |
| विभिन्न वर्णों के कर्म | १२८ | स्त्री की परतन्त्रता | १९२ |
| पुरोहित का महत्त्व | १२९ | स्त्री का धर्म | १९३ |
| ब्राह्मणवध का दण्ड | १३३ | व्यभिचार के प्रायश्चित्त | १९४ |
| क्षत्रियवध का दण्ड | १३३ | स्त्रियों की पवित्रता | १९७ |
| वैश्यवध का दण्ड | १३४ | विधवा-विवाह | १९८ |
| स्त्रीवध का दण्ड | १३४ | अगम्या स्त्रियाँ | १९९ |
| साक्षी के गुण | १३५ | चाण्डालीगमन का प्रायश्चित्त | २०० |
| राजा के लिए प्रायश्चित्त | १३९ | आपद्धर्म | २०१ |
| एकादश अध्याय | गृह्याग्नि का आधान | २०३ | |
| विवाह के भेद | १४० | तृतीय अध्याय | |
| श्रेष्ठ विवाह | १४२ | स्नान के नियम | २०६ |
| विवाह का महत्त्व | १४३ | स्नान के स्थान | २०७ |
| कन्याविक्रय का पाप | १४५ | स्नातक के व्रत | २०९ |
| वेदज्ञ की महिमा | १४८ | अन्न का दान | २१० |
| पर्व पर अनध्याय | १५० | धनदान का नियम | २१२ |
| द्वितीय प्रश्न | भोजन की विधि | २१३ | |
| प्रथम अध्याय | मांसभक्षण | २१४ | |
| प्रायश्चित्त | १५३ | कर्त्तव्याकर्त्तव्य | २१५ |
| भ्रूणहत्या | १५३ | निवासयोग्य स्थान | २१८ |
| ब्राह्मणवध | १५४ | अर्घ्य व्यक्ति | ३२० |
| क्षत्रिय तथा वैश्य का वध | १५६ | उत्तरीय वस्त्र | २२१ |
| गुरुपत्नीगमन का प्रायश्चित्त | १५७ | चतुर्थ अध्याय | |
| सुरापान | १५८ | सन्ध्योपासन | २२२ |
| अवकीर्णी का प्रायश्चित्त | १६३ | गायत्री जप | २२६ |
| महापातकी | १६५ | प्राणायाम | २२७ |
| पतनीयकर्म | १६८ | सन्ध्योपासना की महत्ता | २३० |
| उपपातक | १७० | पञ्चम अध्याय | |
| पतित के पुत्र का पतन | १७३ | शरीरशुद्धि | २३३ |
| विक्रयार्थ निषिद्ध वस्तुएँ | १७५ | स्नान की विधि | २३५ |
| कृच्छ्र व्रत के भेद | १७७ | तर्पण के मन्त्र | २४० |
| षष्ठ अध्याय | |||
| पञ्चमहायज्ञ | २४६ |