बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 49, कुल 486 में से
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| विषय | पृ० | विषय | पृ० |
|---|---|---|---|
| याज्ञिक कर्मों के भेद | २४८ | पालनी, सिलोञ्छा, कपोता | ३१३ |
| वानप्रस्थ के कर्त्तव्य | २५० | वान्या वृत्ति | ३१४ |
| परिव्राजक के कर्त्तव्य | २५१ | तृतीय अध्याय | |
| ब्राह्मण की महिमा | २५५ | वानप्रस्थ के भेद | ३१५ |
| सप्तम अध्याय | वैखानस के नियम | ३१९ | |
| आत्मयज्ञ | २५९ | वनवास की प्रशंसा | ३२० |
| भोजनविधि | २६१ | चतुर्थ अध्याय | |
| भोजन की मात्रा | २६६ | ब्रह्मचारी के लिए प्रायश्चित्त | ३२१ |
| उपवास निषिद्ध | २६७ | पञ्चम अध्याय | |
| अष्टम अध्याय | अघमर्षण सूत्र का प्रयोग | ३२३ | |
| श्राद्ध की महत्ता | २६८ | अघमर्षण का महत्त्व | ३२४ |
| पंक्तिपावन ब्राह्मण | २६९ | षष्ठ अध्याय | |
| ब्राह्मणभोजन | २७१ | प्रसृतयावक | ३२६ |
| दान की विधि | २७५ | यव की प्रशस्ति | ३२७ |
| श्राद्धभोजन में ब्राह्मणों की संख्या | २७६ | सप्तम अध्याय | |
| नवम अध्याय | कूष्माण्डमन्त्र-प्रयोग | ३३१ | |
| त्रिविध ऋण | २७८ | अनुचित मैथुन का व्रत | ३३२ |
| पुत्रोत्पत्ति का महत्त्व | २७९ | व्रत में निषिद्ध कर्म | ३३३ |
| दशम अध्याय | अग्निपरिचर्या | ३३८ | |
| संन्यास के नियम | २८१ | अग्निहोत्री के लिए कर्म | ३३९ |
| ब्रह्मान्वाधान | २८६ | अष्टम अध्याय | |
| अग्निहोत्र | २८७ | चान्द्रायण व्रत | ३४१ |
| तर्पण | २९१ | लौकिक अग्नि की रक्षा | ३४२ |
| सावित्री मन्त्र का जप | २९२ | होम के मन्त्र | ३४३ |
| संन्यासी के व्रत | २९३ | स्त्री-शूद्र से भाषण निषिद्ध | ३४७ |
| आत्मयज्ञ | २९६ | चान्द्रायण के भेद | ३४९ |
| संन्यासी का भोजन | २९७ | चान्द्रायण का महत्त्व | ३५० |
| प्रणव की महिमा | ३०१ | नवम अध्याय | |
| तृतीय प्रश्न | अनश्नत्पारायण | ३५१ | |
| प्रथम अध्याय | हवन के मन्त्र | ३५२ | |
| वृत्ति | ३०३ | पारायण का पुण्य | ३५४ |
| शालीन एवं यायावर | ३०४ | दशम अध्याय | |
| द्वितीय अध्याय | पाप कर्म से दोष | ३५६ | |
| षणिप्रवर्त्तिनी वृत्ति | ३०९ | प्रायश्चित्त का विवाद | ३५७ |
| कौष्ठाली, ध्रुवा | ३१० | पाप दूर करने के साधन | ३५८ |
| संप्रक्षालनी, समूहा | ३१२ | पवित्र स्थान | ३६० |
| दान योग्य वस्तुएँ | ३६१ |