बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 50, कुल 486 में से
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[ ४६ ]
| चतुर्थ प्रश्न | पृ० | पृ० | |
|---|---|---|---|
| प्रथम अध्याय | अतिकृच्छ्र | ३८५ | |
| भिन्न-भिन्न प्रायश्चित्त | ३६२ | कृच्छ्रातिकृच्छ्र | ३८५ |
| प्राणायाम की विधि | ३६३ | तप्तकृच्छ्र व्रत | ३८५ |
| प्राणायाम से पापमुक्ति | ३६४ | सान्तपन कृच्छ्र | ३८६ |
| विवाह की अवस्था | ३६५ | कुशोदकपान | ३८७ |
| ऋतुमती कन्या का विवाह न करने से दोष | ३६६ | पञ्चगव्य | ३८७ |
| कन्या द्वारा पतिवरण | ३६६ | महासान्तपन | ३८८ |
| कन्या का अपहरण | ३६७ | चान्द्रायण व्रत | ३८८ |
| अणघ्नी पत्नी | ३६८ | शिशु तथा यतिचान्द्रायण | ३८९ |
| योग का महत्त्व | ३६९ | तुलापुमान् व्रत | ३८९ |
| ओंकार का महत्त्व | ३७० | यावकभक्षण | ३९० |
| द्वितीय अध्याय | ब्रह्मकूर्च | ३९१ | |
| प्रायश्चित्त तथा दोष | ३७१ | भिक्षा से शुद्धि | ३९२ |
| दान लेने का प्रायश्चित्त ३७१ | ३७१ | जल पीने से पापशुद्धि | ३९२ |
| निषिद्ध भोजन का प्रायश्चित्त | ३७२ | वेद पारायण से पापशुद्धि | ३९२ |
| ब्राह्मणहत्या का प्रायश्चित्त | ३७२ | गायत्री-जप | २९३ |
| उपपातक के प्रायश्चित्त | ३७४ | षष्ठ अध्याय | |
| अघमर्षण सूक्त का महत्त्व | ३७५ | जप द्वारा पापशुद्धि | ३९४ |
| तृतीय अध्याय | इष्टियों द्वारा पापशुद्धि | ३९४ | |
| रहस्य प्रायश्चित्त | ३७६ | जप तथा दान | ३९५ |
| पापनाशक मन्त्र | ३७८ | सप्तम अध्याय | |
| चतुर्थ अध्याय | पुण्यकर्मा के लिए व्रत अनावश्यक | ३९७ | |
| प्रमाद का प्रायश्चित्त | ३७९ | गणहोम के मन्त्र | ३९९ |
| धर्मशास्त्र के उपदेश योग्य व्यक्ति | ३८१ | अष्टम अध्याय | |
| पञ्चम अध्याय | लोभ प्रेरित गणहोम का पाप | ४०४ | |
| वेद से संबद्ध कर्म | ३८२ | गणहोम का माहात्म्य | ४०५ |
| प्राजापत्य कृच्छ्र | ३८४ | धर्मशास्त्रश्रवण द्वारा दोषों की शान्ति | ४०७ |
| बालकृच्छ्र | ३८४ | परिशिष्ट | |
| विवरण में उद्धृत वाक्यों का सन्दर्भ-निर्देश | ४०९ | ||
| सूत्रों में आये हुए नामों एवं विषयों की अनुक्रमणिका | ४१६ |