बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)

बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
पृष्ठ 471, कुल 486 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 471
परिशिष्टम्
| उद्धरण | सन्दर्भ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| प्रच्युतः कालः | यास्क २. ७. ३. | ३०४ |
| प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः | तै. उ. १. ११. | २५३ |
| प्रजानिःश्रेयसं | आप. गृ. १. ८. ४. ६. | १८० |
| प्रजातिस्त्रियाम् | तै. ब्रा. २. ४, ६. | १४१ |
| प्रणष्टस्वामिकं | मनु. ८. ३०. | १३२ |
| प्रचानामितरे कुर्वीरन् | व. ध. ४. १९ | ८० |
| प्रतिबध्नाति हि श्रेयः | रघु. वं. १ ७९. | २२० |
| प्रतिलोमं चरेयुस्ताः | व. ध. २१. १४. | १९४ |
| प्रत्यग्ने मिथुनादह | ऋ. सं. ८. ४. ९. | २७० |
| प्रत्यग्रहरसाहरः | सा. सं. पू. १. २. ५. | २७१ |
| प्रत्यासन्नमधीयानं | शातातपः | ७२ |
| प्रत्युद्धारः पुत्रजन्मना | व. ध. १५. १७ | १६६ |
| प्रसमित्र मर्तो अस्तु | तै. सं. ४. १. ६. | ३०१ |
| प्रदेशिन्यङ्गुष्ठयोर्मध्ये | व. ध. ३. ६१ | ४९ |
| प्रदेशिन्यङ्गुष्ठभ्यान्तु | ५२ | |
| प्रसारितं च यत्पण्यं | व, ध. ३. ४५ | ६० |
| प्रागुपनयनात्कामचारं | गौ. ध. २. १ | १९ |
| प्रागुत्तमास्त्रय आश्रमिणः | गौ. ध. २८. ५०. | ४ |
| प्राची दिगग्निदेवता | तै. ब्रा. ३. ११. ५ | ३४४ |
| प्राच्यै दिशे स्वाहा | तै. सं. ७. १. १५. | ३५४ |
| प्राणस्यान्नमिदं सर्वं | मनु. ५. २८. ९ | ९४ |
| 'प्राणायामस्तथा ध्यानम् | ३६९ | |
| प्राणापान | याज्ञिकी ६६. | ३७८ |
| प्राणे निविष्टः | याज्ञिकी, ४९. | २६१ |
| प्रायश्चित्तीयतां प्राप्य | मनु. ११. ४७. | २०९ |
| बुद्धे चेत्क्षेमप्रापणं | आप. ध. २. २१. १६. | २५८ |
| ब्रह्ममे तु माम् | याज्ञिकी. ६३. | २४९ |
| ब्रह्मचर्यादेव प्रव्रजेत् | जाबालोप. ४. | २५९ |
| ब्रह्म वै चतुर्होतारः | तै. ब्रा. ३. १२. ५, | ३०१ |
| ब्रह्मा देवानाम् | तै. सं. ३. ४. ११. | ३२९ |
| ब्राह्मणं पुरोदधीत | गौ. ध. ११. १२. | १२९ |
| ब्राह्मणक्षत्रियविशां | व. ध. २१. १४. | १९४ |
| ब्राह्मणश्चेत्प्रेत्त्यापूर्वं | व. ध. २१. १७ | १९५ |
| ब्राह्मणाभिशंसने | गौ. ध. २१. १७. | १७७ |
| ब्राह्मणेषु च विद्वांसः | मनु. १. ९७. | २७० |
| ब्राह्मणो ब्राह्मणं हत्वा | सुमन्तुः | १५४ |
| ब्राह्मणो धर्मान् प्रब्रूयात् | व. ध. १. ४१. | ४ |