बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें॥ श्रीः ॥
बौधायन-धर्मसूत्रम्
सानुवाद-श्रीगोविन्दस्वामिप्रणीतविवरणोपेतम्
प्रथमः प्रश्नः
तत्र प्रथमाध्याये प्रथमः खण्डः
उपदिष्टो धर्मः प्रतिवेदम् ॥ १ ॥
**अनु०—**धर्म का उपदेश वेद की प्रत्येक शाखा मे किया गया है ॥ १ ॥
उपदिष्टः प्रदर्शितः प्रतिवेदम् प्रतिशाखम् । अतीन्द्रियार्थप्रतिपादको नित्यो ग्रन्थराशिवेदः । तत्प्रतिपाद्यो धर्मः । यद्यप्येकैकस्यां शाखायां परिपूर्णान्यङ्गानि, तथाऽपि कल्पसूत्रान्तरै१शाखान्तरोक्तांश्चोपसंहारः क्रियत एव ॥ १ ॥
तस्याऽनु व्याख्यास्यामः ॥ २ ॥
**अनु०—**हम उसी के अनुसार धर्म की व्याख्या करेंगे ॥ २ ॥
अन्विति । पश्चादित्यर्थः ॥ २ ॥
स्मार्तो द्वितीयः ॥ ३ ॥
**अनु०—**स्मृति में प्रतिपादित धर्म दूसरे स्थान पर आता है ॥ ३ ॥
**टिप्पणी—**स्मार्त धर्म के अन्तर्गत वर्णधर्म, आश्रमधर्म, वर्णाश्रमधर्म, गुणधर्म और निमित्तधर्म पाँच प्रकार के धर्म आते हैं । ये धर्म भी साधारण और विशिष्ट दो प्रकार के हैं ।—गोविन्द स्वामी । इस सूत्र से यह भी अभिव्यक्त है कि स्मृति और श्रुति के नियमों में पारस्परिक विरोध होने पर श्रुति-नियम प्रवल होते हैं। गोविन्द के अनुसार 'स्मृति' का अर्थ 'अनुभूतविषयासम्प्रमोषाभिव्यञ्जक ग्रन्थ' है ।
१. क्तांशोप, इति क. पु.