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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
महर्षि बौधायन द्वारा
स्रोत: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (उद्गम)
DevanagariHindipublished486 पृष्ठ
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४२६ | बौधायन-धर्मसूत्रम्
| ब्रह्मान्ववधान २८६ | यतिचान्द्रायण ३८९ |
| ब्रह्मौदन १०८ | यम १६४, ४०४ |
| ब्राह्म, तीर्थ ४८, मुहूर्त ३५५, विवाह १४० | यमुना १३ |
| ब्राह्मण, अवध्य १३२, उपनयन १९, ब्राह्मण २५५, का धन ८२, दो नाम १४९; कृषि-कर्म २०२, दण्ड १३२, वाणिज्य १७५ पंक्तिपावन २६९, ३५५, वध का दण्ड १३३, संख्या २७६, की हत्या ३७०, ३७२ विचारहित ७३, श्राद्धभोजन २७१, का वध ३२५, ३३३ | यवागू ३२६, ३३४ |
| यातुधान २७५ | |
| यायावर २५९, २८२, २९४, ३०३, ३०४, ३०६, ३९२ | |
| यावकभक्षण ३६०, ३९० | |
| योग ३६९ | |
| रक्षोदेवता १६४ | |
| रजस्वला ९० | |
| भक्ष्य ९५ | रथकार २६, १२५ |
| भरद्वाज ३९६ | राक्षस १४१ |
| भाल्लविन् १३१ | राजीव ९६ |
| भिक्षा ३३४ | रुद्र ११४, ३५९, ३९५ |
| भूतयज्ञ २४६ | रोमशकरि ९६ |
| भूतात्मा ४६ | रोहित ९६ |
| भ्रूणघ्नी ३६८ | वंग १४ |
| भ्रूणहत्या ३६६, ३६७ | वरुण ४०, २२९, २३२, २९०, २९९ |
| भ्रूणहा १५३, ३९३ | वर्मी ९६ |
| मगध १४ | वल्कल १०३ |
| मत्स्य ९६ | वसन्त १९ |
| मधु ३६४ | वस्त्र, रेशमी ५६, १०२, वृक्ष की छाल १०३, यज्ञ का १०१, उत्तरीय २२१, काषाय २५२, २७५, ३१४ संन्यासी का २९२, ३६१, नवीन ३४१, वृक्ष की छाल २५२ |
| मधुच्छन्दा ३९४ | |
| मधूदक ११२ | |
| मनुष्य यज्ञ २४६ | |
| मयूर ९६ | वान्था ३१४ |
| महाव्याहृति २६० | वायु ४०४, वायुभक्ष ३१८, ३१९ |
| महासान्तपन ३८८ | वारुणी १६० |
| मांस १५०, २१४, ३६४, ३२१, ३३३ | वार्ध्राणस ९६ |
| मागध १२३, १२६ | वार्धुषिक ७१ |
| मार्जन ३९४ | वास्तोष्पतीय ३०१ |
| मार्जलीय १०८ | विकल्पी ४ |
| मित्र २२९, २३२, २९९ | विधवा १९८ |
| मृगारेष्टि ३९४ | विधुर २८२ |
| मृग्युलाङ्गल ३७८ | विरजा, मन्त्र ३७८ |
| मौञ्जीबन्धन १८ | विवाह ३४५ अनियमितता १६७ कन्या, की अवस्था ३६५ |
| मौद्गल्य १९८ | |
| यजुर्वेद ३७७, ३८२, ३९२ | वृत्ति ३०३ |
| यजुस ४०८ | वेद ३५९ |
| यज्ञोपवीत ३५ | वेदान्त ३५९ |
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परिशिष्टम्
| ४२७ | |
|---|---|
| वेश्या ३२८ | सप्तर्षि ३५६ |
| वैण १२३, १२७ | समिदाहरण ३० |
| वैतुषिक ३१६ | समूहा ३०४, ३१२ |
| वैदेहक १२३, १२६ | सम्प्रक्षालनी ३०४, ३१२ |
| वैश्य १९, वर्ण १२१, से कमण्डलु ४१, पत्नियां १२२, का पुत्र १२५, कर्तव्य १२८, के वध का दण्ड १३३, आपत्काल में २०२ | सर्वपृष्ठा १४<br>सर्वारण्यका ३१६<br>सवन ३५५, ४०१, ४०८<br>सवर्णा १८४ |
| वैश्वदेव २०९, २९४ | सहस्रदंष्ट्र ९६ |
| वैश्वानरी १५, ३०५, ३९४, ३९९ | सहस्राक्ष ४०४ |
| व्याहृति ३९, २२७, २४०, २६०, २८५, २९०, २९२, ३०२, ३७०, ३७२, ३७६, ३७८, ३८०, ३९४ | सहोढ १८७<br>सान्तपन ३८६<br>सामवेद ३७७, ३८२, ३९२, ४०८ |
| व्रत ३६१ | सामुद्र शुल्क १३१ |
| व्रतपती १५ | सावित्री २४०, २८५, २९२, ३५९ |
| व्रात्य १२७ | सिद्धेच्छा ३०४, ३१४ |
| शंखपुष्पी १६० | सिन्धु १४ |
| शरद् १९ | सिलोञ्छा ३०४, ३१३ |
| शालीन २८२, २९४, ३०३, ३०४ | सुरभिमती २९० |
| शिक्य २८४ | सुराष्ट्र १४ |
| शिशु आङ्गिरस २८ | सुवर्ण ३६१, का दान ४०३ |
| शिशु चान्द्रायण ३८९ | सूत १२६ |
| शिष्ट २, परम्परा ११ | सूर्भि १५७ |
| शूद्र, अतिथि २१०, अन्न ३६३, स्त्री ३६६, की सेवा १६९, से कमण्डलु ४१, से व्यभिचार १९४, का अन्न ३२८ शूद्र से बात नहीं ३४७ | सूर्य ३४७, ४०४<br>सोम १९७, ४०४, का पान ३६०, सोमयज्ञ २४८, २७९<br>सौवीर १४ |
| शूद्रा ३६४, ३९५, से विवाह २१८, से मैथुन ३७४ | स्त्री, ऋतुमती ३६७, की पवित्रता १९७, की परतन्त्रता १९३, की प्रतिमा १५७, के साथ भोजन ९, पिण्डोदक क्रिया नहीं ७९, पुनर्भू ३६७, से बात नहीं ३४७, ३८३ |
| श्मशान १५३ | स्नातक ३४ |
| श्रोणा ३४९ | स्वधा २४६ |
| श्रोत्रिय २१०, २१२ | स्वयंभू ४३ |
| श्वपाक १२७ | स्वाध्याय २४७, २७९, ३०० |
| षण्णिवर्तनी ३०४, ३०९ | स्वाहा २४६ |
| सङ्कीर्णयोनि १४ | हारीत १७३ |
| सकुल्य ८१ | होता ११९ |
| सन्दंशी ३११ | |
| सन्ध्योपासन २२२ | |
| सपिण्ड ७८ |
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- आपस्तम्बधर्मसूत्रम्। हरदत्तमिश्र कृत 'उज्ज्वला' टीका ए० चिन्नस्वामी शास्त्री कृत भूमिका, टिप्पणी, शब्दानुक्रमणिका डॉ० उमेशचन्द्र पाण्डेय कृत हिन्दी टीका (का. ९३)
- गोभिलगृह्यसूत्रम् । मुकुन्द झा बक्शी कृत संस्कृत टीका, डॉ० सुधाकर मालवीय कृत हिन्दी टीका (का. ११८)
- गौतमधर्मसूत्राणि । गौतमकृत । हरदत्त कृत 'मिताक्षरा' संस्कृत टीका तथा रमेशचन्द्र पाण्डेय कृत हिन्दी टीका (का. १९२)
- धर्मसिन्धुः । काशीनाथ उपाध्याय कृत। वशिष्ठ दत्त मिश्र कृत 'सर्वतोमुखी' हिन्दी टीका तथा सुदामा मिश्र शास्त्री कृत 'सुधा' ... गजानन शास्त्री मुसलगाँवकर कृत समीक्षात्मक प्रस्तावना (का. १२३)
- नारद स्मृति। 'तिलोत्तमा' संस्कृत एवं हिन्दी टीका ...
डॉ० ब्रजकिशोर स्वैन (ना. स. ग्र. २६) - पारस्करगृह्यसूत्रम्। प्रथम दो कांड पर हरिहर भाष्य तथा गदाधर भाष्य एवं तृतीय काण्ड पर हरिहर तथा जयराम भाष्य गोपाल शास्त्री नेने कृत भूमिका, नोट्स तथा सुधाकर मालवीय कृत हिन्दी व्याख्या सहित, प्र० काण्ड एवम् सम्पूर्ण (का. १७)
- मनुस्मृतिः। कुल्लूक भट्ट कृत 'मन्वर्थमुक्तावली' टीका तथा हरगोविन्द शास्त्री कृत 'मणिप्रभा' हिन्दी टीका। गोपाल शास्त्री नेने कृत भूमिका १-२ अध्याय, ७वां अध्याय एवम् सम्पूर्ण (का. ११४)
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