बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
पृष्ठ 142, कुल 774 में से
संदर्भ में पढ़ें: वषट्कृत - wait! The e-mātrā might be missing or broken, but let's check: Wait, in line 16: 'वषट्कृते'. The 'ते' clearly has a slant above. In line 17: 'वषट्कृत' - wait, is there an e-mātrā? No, it looks like just 'वषट्कृत'! But let's look at line 18: उत्तरार्धपूर्वार्धे ऽतिहाय पूर्वा आहुतीर्जुहोत्यथोदङ्ङत्याक्रम्य Wait, if it's "वषट्कृते उत्तरार्ध...", sandhi of वषट्कृते + उत्तरार्ध = वषट्कृत उत्तरार्ध (lopa of e before u/short vowels in Vedic/Sanskrit sandhi: वषट्कृत उत्तरार्ध- or वषट्कृतऽउत्तरार्ध-). Yes! "वषट्कृत उत्तरार्धपूर्वार्धे ऽतिहाय"!! That's classic sandhi: वषट्कृते + उत्तरार्ध- -> वषट्कृत उत्तरार्ध-.
Line 18: उत्तरार्धपूर्वार्धे ऽतिहाय पूर्वा आहुतीर्जुहोत्यथोदङ्ङत्याक्रम्य Let's check the letters: उ - त् - त - र - ा - र् - ध - प - ू - र् - व - ा - र् - धे = उत्तरार्धपूर्व