भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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/ L4: क्रामत्यो॑ Wait, in L3: द (da) ङ्ङ (ṅṅa) ति (ti) - with anudatta? Wait, in L3: उदङ्ङुति- or उदङ्ङति-? Look at L3: ऽव॑दायोदङ्ङति- L4: क्रामत्यो॑ In L9: दक्षिण॒तो ऽव॑दायोदङ्ङति॒क्रामत्यो॑ (ति has anudatta: ति॒) In L15-16: L15 ends with: दक्षिण॒तो ऽव॑दायो- १५ L16: दङ्ङति॑क्रामत्यो॑ (ति has udatta: ति॑)

Wait, let's verify line 20: "मित्य॒ग्नाव॑नुप्रहरत्य॑थैने सꣳस्रावेणा॑भि॒जुहोत्य॑थ दक्षिण॒तो ऽत्या- २०" L21: "क्रम्य यथा॒यतनꣳ स्रुचौ साद॑यित्वा यज्ञोपवीतानि कुर्वते॑ '" Here: "दक्षिणतो ऽत्याक्रम्य" (dakṣiṇato 'tyākramya)! Exactly the same root अति + क्रम्!

Let's check L17: "कव्यवाहनꣳ स्विष्टकृतꣳ स्व॒धा कु॑र्विति