बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
पृष्ठ 183, कुल 774 में से
संदर्भ में पढ़ेंह्य ५-> wait, is itअपिगृह्य? अ प ि ग ृ ह ् य=अपिगृह्य. Yes, अपिगृह्य ५`.
Line 6:
स्मयासे यदि कण्डूयासै कृष्णविषाणया कण्डूयासै यदि वाचं
Yes, absolutely clear.
Line 7:
विसृजेर्वैष्णवीमृचमनुद्रवतान्या ल्यान्यत्र दीक्षिताविमितात्सूर्यो
Wait, look at ल्यान्यत्र:
Could it be ल्यान्यत्र or ल्यान्यत्र or न्यान्यत्र?
Let's look at that glyph again.
Wait! Could it be न्यान्यत्र with a broken न्?
Look at the hook: it goes up and then down, then a stem. It looks like ल्यान्यत्र.
Let's write ल्यान्यत्र (or ल्यान्यत्र). In Devanagari, ल्यान्यत्र.
Wait, what about दीक्षिताविमितात्सूर्यो?
Let's re-examine दीक्षिताविमितात्सूर्यो:
दी क ् ष ि त ा व ि म `ि