भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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हावादत्त"? It's "गृहावादत्त"! (ग्रहौ + आदत्त = गृहावादत्त / ग्रहावादत्त? Wait, it's "ग्रहावादत्त"!) Look at the first letter: Is it 'गृ' or 'ग्र'? Look at 'ग्रहस्य' in line 6: "पात्रे ग्रहस्य" -> ग with a subscript slant (ग्र). In line 1: "ग्" with subscript slant "र" -> "ग्रहावादत्त"! Yes, ग + र = ग्र, not गृ! "ग्रहावादत्त" (ग्रहौ + आदत्त -> ग्रहावादत्त in Vedic dual sandhi!).

Let's check line 1: "योपनिष्क्रामत्युपनिष्क्रामन्तञ्चैवाध्वर्युर्ग्रहावादत्त ' उत्तरतस्तिष्ठते" Wait, "न्तञ्चैव" or "न्तं चैव"? There is a ञ्च: "न्तञ्चैवाध्वर्युर्ग्रहावादत्त".

Let's check line 2: "प्रतिप्रस्थात्रे प्रतिनिर्ग्राह्यं प्रयच्छत्याश्रावयत्यो श्रावयास्तु"

Line 3: "श्रौषडश्विभ्यां प्रेष्येति ' वषट्कृते सहोभौ जुहुतो ' हुत्वा वाचयति"

Line 4: "यो नो ऽश्विनावभिदासति भ्रातृव्य उत्पिपीते शुभस्पती" Wait, is it "उत्पिपीते"