बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
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यतो¹ ऽध्वर्युश्च प्रतिप्रस्थाता च सहैवेषे पी॑पि॒ह्यूर्जे॑ पी॑पि॒हि ब्रह्म॑णे पी॑पि॒हि क्ष॒त्राय॑ पी॑पि॒ह्य॒द्भ्यः॑ पी॑पि॒ह्योष॑धीभ्यः पी॑पि॒हि वन॒स्पति॑भ्यः पी॑पि॒हि द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ पी॑पि॒हि सु॒भूता॑य पी॑पि॒हि ब्रह्म॑वर्च॒साय॑ पी॑पि॒ ह्यज॑मानाय पी॑पि॒हि मह्यमित्युपा॒ꣳश्वा ज्यैष्ठ्याय॑ पी॑पि॒हीत्युच्चैर्यैनमनुदिग्भिरात्मानमभि पीपयति ५ ल्लिष्यै त्वा द्युम्नाय त्वेन्द्रियाय त्वा भृत्यै त्वेत्य॑थ यन्महावीरे पयस्तदुपयमने समवनयत्य॑थोदङ्ङुत्क्रम्याथैतदुपयमनमन्तर्वेदि प्राचीनविलꣳ सादयत्येतस्मिन्काले प्रतिप्रस्थाता राजतꣳ रुक्ममुदासनीये खर उपगूहति ' तस्मिन्प्रचरणीयं महावीर