भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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taṃ) त्रिः (triḥ) पुनः (punaḥ) प्रतिपर्यत्यै॑तस्मिन्नेव (pratiparyatyai'tasminneva) दीर्घवं᳭शे (dīrghavaṁ᳭śe) प्रग्रध्नाति (pragradhnāti)

Line 2: मण्डूकमवकां वेतसशाखां दर्भस्तम्बमिति॑ तेन यत्राक्- म (ma) ण्डू (ṇḍū) क (ka) म (ma) व (va) कां (kāṃ) वे (ve) त (ta) स (sa) शा (śā) खां (khāṃ) द (da) र्भ (rbha) स्त (sta) म्ब (mba) मि (mi) ति (ti) ॑ (apostrophe) ते (te) न (na) य (ya) त्रा (trā) क्- (k-)

Line 3: खयमातृण्णायै भवति तद्विकर्षति समुद्रस्य त्वावकया हिमस्य ख (kha) य (ya) मा (mā) तृ (tṛ) ण्णा (ṇṇā) यै (yai) भ (bha) व (va) ति (ti) त (ta) द्वि (dvi) क (ka) र्ष (rṣa