भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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स मे होता होतर्होतारं त्वा वृण इति होतारमग्निर्दैवो दैव्यो होता स ते होता तेनानुमतः कर्मैवाहं करिष्यामीत्यों तथेति प्रतिवचनं ' पर्जन्यो देवो दैव उद्गाता स म उद्गातोद्गातरुद्गा- तारं त्वा वृण इत्युद्गातारं ' पर्जन्यो देवो दैव उद्गाता स त उद्गाता तेनानुमतः कर्मैवाहं करिष्यामीत्यों तथेति प्रतिवचन- ५ माकाशो देवो दैव्यो सदस्यः स मे सदस्यः सदस्य सदस्यं त्वा वृण इति सदस्यमाकाशो दैवो देवः सदस्यः स ते सदस्यस्तेनानु- मतः कर्मैवाहं करिष्यामीत्यों तथेति प्रतिवचनमापो देव्यो दैव्या होत्राशꣳसिन्यस्ता मे होत्राशꣳसिन्यो होत्रका होत्रकान्वो वृण इति होत्रकानापो देव्यो दैव्या होत्राशꣳसिन्यस्तास्ते हो- १० त्राशꣳसिन्यस्ताभिरनुमताः कर्मैव वयं करिष्याम इत्यों तथेति [L