बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
पृष्ठ 606, कुल 774 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 606
An accurate, line-by-line transcription of the Sanskrit text from the Baudhāyana Śrautasūtra page:
सहस्रतमीꣳ सहस्रा३मिति॑ य॑त्प्राचीमुत्सृजेत्सहस्रꣳ सहस्र- तमन्विया॑त्स॒हस्रमप्र॒ज्ञाच॒र्॑ सुव॒र्गं लो॒कं न प्रजानीया- त्प्र॑तीचीमुत्सृज॑ति॒ ताꣳ सहस्रमनु पर्याव॑र्तते॒ सा प्रजानती॑ सुवर्गं लोकमे॑ति॒ यज॑मानमभ्युत्सृजती॑ति॒ तां पुरस्तात्प्रतीची॑ ५ यज॑मानमभ्युत्सृज॑ति॒ क्षिप्रे सहस्रं प्रजायत उत्तमा नीयते प्रथमा देवान्गच्छतीति ब्राह्मणं॑ तेन हैतेन रौचिणेयः क्रोथुनिः१ कौलाश्वो२ यास्क ऋत्सुखेषु विह्वतेनेजे३ । ऽथोह हाजमाम३ मगधो गार्ग्य आरुणेरन्तेवासी॑ स४ ह५ सꣳस्या- मदृष्ट्वोवाच४ ननु मत५ एकाहा